लोकायुक्त के मुद्दे पर जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने सरकार का बचाव करते हुए बिल के सदन में न आने पर विपक्ष को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। कहा कि, सरकार ने 27 मार्च 2017 को लोकायुक्त बिल सदन में लाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी थी। शून्यकाल में संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने नियमों के तहत विपक्ष के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए साफ किया कि लोकायुक्त विधेयक सदन की संपत्ति बन चुका है। लोकायुक्त पर सदन की पीठ का भी निर्देश आ आ चुका है। लिहाजा सदन ही निर्धारित करेगा कि कौन सा विषय लाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ऐसे विधेयकों को सदन में पेश किए जाने से पहले कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में विचार किया जाता है। कार्यमंत्रणा समिति में विपक्ष के भी सदस्य होते हैं। पंत ने साफ किया कि विपक्ष ने कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में लोकायुक्त बिल को सदन में लाने की कोई पहल नहीं की। जब भी सदन चाहेगा, सरकार लोकायुक्त बिल लाएगी। संसदीय कार्यमंत्री के जवाब के बाद सत्ता पक्ष ने मेज थपथपाकर खुशी जाहिर की। जबकि सरकार के जवाब से नाराज नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और प्रीतम सिंह ने पंत पर सदन की प्रक्रिया ही बदल देने का आरोप लगा दिया। नियम 58 की ग्राह्यता में हुई समूची चर्चा के बाद स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल ने लोकायुक्त पर नियम 310 में उठाई गई विपक्ष की सूचना को अस्वीकार कर दिया।