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Uttarakhand Assembly Session: सदन में विपक्ष का जोरदार हंगामा, कांग्रेसियों ने बजट की कॉपी फाड़ी, मार्शल से धक्का मुक्की

Thu, 16 Jun 2022 04:48 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

गुरुवार को विधानसभा सत्र के तीसरे दिन जिला विकास प्राधिकरण के मुद्दे को लेकर खूब हंगामा हुआ। विपक्ष ने तीखे तेवर दिखाते हुए सदन में बजट की कॉपी फाड़ दी। इस बीच विधायक अनुपमा रावत और सुमित हृदयेश की मार्शल से धक्का-मुक्की हुई।  विपक्ष ने कहा कि सरकार ने जो जिला विकास प्राधिकरण बनाए थे, वह भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं। 

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उत्तराखंड विधानसभा सत्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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14 जून से शुरू हुए उत्तराखंड विधानसभा सत्र का तीसरा दिन हंगामेदार रहा। जिला विकास प्राधिकरणों पर नियम 58 में सबसे पहले चर्चा शुरू होते ही विपक्ष ने सदन में सवाल उठाने के साथ जोरदार हंगामा किया। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण खत्म करने को लेकर विपक्ष का अड़ा रहा। जिसके चलते आखिर में सदन शुक्रवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। 

गुरुवार को विधानसभा सत्र के तीसरे दिन जिला विकास प्राधिकरण के मुद्दे को लेकर खूब हंगामा हुआ। विपक्ष ने तीखे तेवर दिखाते हुए सदन में बजट की कॉपी फाड़ दी। इस बीच विधायक अनुपमा रावत और सुमित हृदयेश की मार्शल से धक्का-मुक्की हुई। विधानसभा स्पीकर के कई बार कहने के बावजूद विपक्ष शांत नहीं बैठा। विपक्ष ने कहा कि सरकार ने जो जिला विकास प्राधिकरण बनाए थे, वह भ्रष्टाचार का अड्डा बन गए हैं। 

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विधानसभा सत्र के पहले दिन धामी सरकार ने मंगलवार को 65571.49 करोड़ का बजट सदन में पेश किया था। बुधवार को उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे दिन बजट पर परिचर्चा हुई। साथ ही बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल और चंदन रामदास विपक्ष के सवालों से घिरते नजर आए।

विपक्षी सदस्यों का आरोप था कि मंत्री सवालों के जवाब देने के बजाय तर्क-वितर्क करके सदन का समय खराब कर रहे हैं। सीधे जवाब देने के बजाय बातों को घुमाया जा रहा है। वहीं गुरुवार को सत्र के तीसरे दिन विपक्ष एक बार फिर सरकार को घेरता नजर आया। जिला विकास प्राधिकरण के मुद्दों को लेकर सदन में विपक्ष ने तीखे तेवर दिए। 

कांग्रेसियों ने बजट की कॉपी फाड़ी

जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण समाप्त करने की मांग को लेकर विपक्ष का जोरदार हंगामा किया। इस बीच विधायक अनुपमा रावत और सुमित हृदयेश की मार्शल से धक्का-मुक्की हुई। वहीं कांग्रेसियों ने सदन में बजट की कॉपी फाड़ी। विधानसभा स्पीकर के कई बार कहने के बावजूद विपक्ष शांत नहीं बैठा। 

विधानसभा स्पीकर समझाती रहीं

जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण को समाप्त करने की मांग को लेकर कांग्रेस विधायक सदन में धरने पर बैठ गए। कांग्रेस विधायक बात सुनने की जिद पर अड़े। जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पहले धरना खत्म करें, तब बात सुनूंगी। विधायक धरने से उठे, लेकिन फिर बात नहीं सुने जाने पर आक्रोश जताते हुए वेल में आकर धरने पर शुरू कर दिया।

सदन में धरने पर बैठे विपक्षी नेता

जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण खत्म करने को लेकर विपक्ष ने सदन में पहले हंगामा किया। इसके बाद कांग्रेस विधायक वेल में धरने पर बैठ गए हैं। विपक्ष ने कहा पूर्व में विधानसभा से जो कमेटी चंदन रामदास की अध्यक्षता में गठित हुई थी, उसकी रिपोर्ट कहां गई। कांग्रेस के हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कुछ देर रुकी। 

संसदीय कार्य मंत्री ने दिए विपक्ष के सवालों के जवाब

संसदीय कार्य मंत्री एवं शहरी विकास मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो पैसा प्राधिकरण कमाते हैं, उस क्षेत्र में अवस्थापना से जुड़े कामों में लगता है। 2016 के बाद जो क्षेत्र जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण में शामिल हुए थे, वहां मानचित्र की कोई अनिवार्यता नहीं है। इसके बाद मंत्रिमंडलीय उप समिति की रिपोर्ट के आधार पर तमाम राहत दी गई। तय किया गया था कि अगर 2016 के बाद विकास प्राधिकरण में शामिल होने वाले नए क्षेत्रों को नक्शा पास कराने की स्वेच्छा से आजादी होगी, बाध्यता नहीं होगी। मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया था कि 2016 से पूर्व के बने हुए विकास प्राधिकरण को छोड़कर नए जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण को स्थगित किया गया था।

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उप नेता प्रतिपक्ष ने कहा- जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण बेतुका निर्णय

उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि प्राधिकरण की जरूरत क्यों है? पालिका, नगर पंचायत से नक्शे पास होते थे। जब प्राधिकरण इतना पैसा वसूल रहा है तो उसके बदले जनता को क्या सुविधा दे रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में शुल्क दो फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में शुल्क पांच फीसदी। जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण बेतुका निर्णय है। गरीबों से यह मात्र वसूली का जरिया है। उप नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछली कमेटी की रिपोर्ट को पटल पर रक्खकर प्राधिकरण को समाप्त किया जाए। 

प्राधिकरण से आम लोग परेशान: विपक्ष

ज्वालापुर कांग्रेस विधायक रवि बहादुर ने कहा कि जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण लूट का अड्डा बन चुके हैं। हरिद्वार जिले में नजूल भूमि बहुत हैं। उन सबसे 25-25 हजार की रसीद काटी जा रही है। वहीं झबरेड़ा के कांग्रेस विधायक विरेन्द्र सिंह ने कहा कि प्राधिकरण में नक्शे की स्वीकृति की जो प्रक्रिया है, वह सुगम नहीं है। इसे सुगम किया जाए। प्राधिकरण की जो आय है उसे उसी क्षेत्र में विकास कार्यों पर खर्च किया जाए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण से आम लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही झबरेड़ा, मंगलौर, खटीमा आदि को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण से अलग किया जाए।

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जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण लूटपाट का जरिया बन गया: अनुपमा रावत

सदन में कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि हरिद्वार ग्रामीण में लोगों से नक्शा मांगा जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण लूटपाट का जरिया बन गया है। लोगों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण क्षेत्रों से प्राधिकरण को खत्म करना चाहिए। वहीं कांग्रेस विधायक सुमित ह्रदयेश ने कहा कि नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया होनी चाहिए। प्राधिकरण इन लोगों पर कार्रवाई करता है।

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