राज्य के 21 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ, जब सत्ता पक्ष के सदस्यों के समय पर सदन में नहीं पहुंचने पर सदन स्थगित करना पड़ा। इससे सरकार की खूब किरकिरी हुई। सदन में स्पीकर पहुंच चुके थे। जबकि सत्तापक्ष के 56 विधायकों में से मात्र चार और विपक्ष के नौ सदस्य मौजूद थे। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए खूब हल्ला किया और कोरम पूरा नहीं होने की बात कहकर सदन से वॉकआउट कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष भी पूरे प्रकरण में नाराज दिखाई दिए।
दरअसल, भोजनावकाश से पहले विशेषाधिकार हनन के मामले में सदन को दो बजे तक स्थगित किया गया था, जिसे बढ़ाकर 2:20 बजे कर दिया गया था। इसके बाद नियत समय पर सदन की कार्यवाही शुरू हुई। स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल भी सदन में पहुंच चुके थे। इस दौरान सत्ता पक्ष से मंत्री सतपाल महाराज, विधायक राजेश शुक्ला, सौरभ बहुगुणा और कुंवर प्रणव चैंपियन ही मौजूद थे। जबकि विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सभी नौ सदस्य सदन में मौजूद थे। थोड़ी देर इंतजार करने के बाद जब सत्ता पक्ष के सदस्य सदन में नहीं पहुंचे तो विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए हो-हल्ला शुरू कर दिया।
इसके बाद विपक्ष ने कोरम पूरा नहीं होने की बात कहकर सदन से वॉकआउट कर दिया। पूरे घटनाक्रम से स्पीकर खासे नाराज दिखाई दिए। उन्होंने विधानसभा सचिव (प्रभारी) को बुलाकर नाराजगी जताई। इसके बाद नाराज स्पीकर ने तीन बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। बताया जा रहा है कि सत्ता पक्ष के सभी सदस्य विधानमंडल दल की बैठक में शामिल होने गए थे। यह बैठक पहले से ही निर्धारित थी। जिसमें भाजपा संगठन के पदाधिकारी भी शामिल हुए।
फोटो सेशन के बाद फिर गायब हो गए सत्ता पक्ष के सदस्य
दोपहर तीन बजे सदन की कार्यवाही पुन: प्रारंभ हुई। 15 अगस्त 2022 को भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं, इसी बात को ध्यान में रखते हुए आजादी की 75वीं वर्षगांठ से 75 सप्ताह पूर्व आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत सदन में अमृत महोत्सव पर चर्चा शुरू हुई। करीब 50 मिनट तक सदन की कार्यवाही के बीच स्पीकर ने सदस्यों को ग्रुप फोटोग्राफी के लिए सदन से बाहर आमंत्रित किया। इसके बाद 4:10 पर जब सदस्य पुन: सदन में लौटे तो गिनती के ही सदस्य सदन में दिखाई दिए। इस बीच सदस्य सदन में आते-जाते रहे। पुन: 5:05 बजे फिर एक बार ऐसी स्थिति बनी, जब सत्ता पक्ष के मात्र छह-सात सदस्य ही सदन में चर्चा में भाग ले रहे थे। जिस पर विपक्ष ने पुन: आपत्ति जताई और अपनी सीटों से उठकर बाहर जाने लगे। स्पीकर ने स्थिति संभालते हुए सदस्यों से चर्चा में बने रहने का अनुरोध किया। थोड़ी देर बार जब सत्ता पक्ष के सदस्य लौट आए, तब जाकर स्थिति सामान्य हुई। इस बीच चर्चा आरंभ रही।