प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार हो रहा है, जिस पर जल्द ही सरकार फैसला लेगी। शुक्रवार को विधानसभा सत्र के दौरान कार्यस्थगन के तहत विधायक आदेश चौहान ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सहायिका के मानदेय का मुद्दा उठाया। इस पर विभागीय मंत्री रेखा आर्य ने बताया कि उत्तराखंड, देश का दूसरा ऐसा राज्य है जो कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सबसे ज्यादा मानदेय देता है। उन्होंने बताया कि केरल में दस हजार मानदेय दिया जाता है, जबकि उत्तराखंड में 7500 रुपये दिया जाता है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 4500 रुपये और राज्य सरकार की ओर से तीन हजार रुपये दिए जाते हैं। इसी प्रकार, मिनि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 4750 और सहायिका को 3500 रुपये मिलते हैं।
उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सुपरवाइजर के पद पर 50 प्रतिशत पद आरक्षित रखे गए हैं। उन्हें वर्ष में 13 दिन अवकाश सहित अन्य सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। पहले विधवा को इन 50 प्रतिशत पदों पर प्राथमिकता मिलती थी, लेकिन उनकी सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 में कोरोना में काम पर 1000 रुपये, रक्षाबंधन में भी 1000 रुपये का प्रोत्साहन दिया गया। इसके बाद 28 मई 2021 को 1000 देने की घोषणा हुई।
26 जुलाई को कोरोना माहमारी में काम पर पांच माह तक 2000 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा हुई, जिसका अनुपूरक बजट में प्रावधान किया गया है। महामारी के दौरान ही 1000 रुपये रक्षाबंधन की घोषणा की है। टीएचआर, मातृत्व योजना, वात्सल्य आदि योजनाओं का लाभ भी उन्हें दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कोरोना से बचाव के तहत प्रशिक्षण और मास्क, सैनिटाइजर सहित सभी बचाव के साधन उपलब्ध कराए गए हैं। 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर एकमुश्त 30 हजार रुपये दिए जाते हैं। बीमा योजना का भी प्रावधान है। उन्होंने बताया कि सरकार उनका मानदेय और बढ़ाने पर विचार कर रही है। विभाग प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा।
सूक्ष्म एवं लघु उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के स्थानीय लोगों को रोजगार न देने पर सितारगंज क्षेत्र में सात उद्योगों को नोटिस जारी किए गए हैं। उद्योगों की ओर से स्थानीय लोगों को रोजगार सुनिश्चित कराने की कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में 481 उद्योगों में 10528 स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है।
शुक्रवार को प्रश्न काल में भाजपा विधायक सौरभ बहुगुणा व खजान दास के प्रश्न पर विभागीय मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि 2005 में शासनादेश जारी कर प्रदेश में स्थापित होने वाले उद्योगों में 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को देने की व्यवस्था की गई थी। प्रदेश में निवेश सम्मेलन (इन्वेस्टर्स समिट) में 1.24 लाख करोड़ पूंजी निवेश के प्रस्तावों पर एमओयू किया गया था। जिसमें 274 निवेश योजनाओं पर काम हुआ है। जिसमें 31631 लोगों को रोजगार मिला है। सितारगंज औद्योगिक क्षेत्र में एक उद्योग से 110 श्रमिकों को हटाने जाने पर मंत्री ने कहा कि मामले का परीक्षण कर कार्रवाई की जाएगी।
बंद लघु उद्योगों के बारे में जानकारी नहीं
विधायक प्रीतम सिंह पंवार के प्रश्न के जवाब में उद्योग मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2000 से 31 मार्च 2021 तक प्रदेश में 54725 एमएसएमई उद्योग लगे हैं। केंद्र सरकार की ओर से प्रत्येक पांच साल बाद पंजीकृत उद्योगों की गणना की जाती है, लेकिन 2006-07 में चतुर्थ अखिल भारतीय लघु उद्योगों की गणना नहीं हुई है। जिससे बंद लघु उद्योगों की संख्या की जानकारी नहीं है।