टिकटों को लेकर मचने वाले घमासान से बचने के लिए भाजपा फूंक फूंक कर कदम रख रही है। आंतरिक सर्वेक्षण के बाद भाजपा ने अब अपने सांसदों से भी उनके क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्रों की रिपोर्ट मांगी है।
इसके साथ राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री और प्रदेश प्रभारी के स्तर से अलग रिपोर्ट बन रही है। हालांकि आंतरिक सर्वेक्षण में कुछ सीटिंग विधायकों की स्थिति कमजोर बताई जा रही है, जिनकी टिकट मिलने का संकट पैदा हो जाएगा। कांग्रेस में जहां टिकट लेने के लिए घमासान मचना शुरू हो गया है, वहीं भाजपा चुपचाप तरीके से दावेदारों की छंटनी में जुटी है।
भाजपा में कांग्रेस की तरह टिकट वितरण की प्रक्रिया नहीं है। भाजपा अपने आंतरिक सर्वेक्षण के साथ कई तरह की रिपोर्ट को आधार बनाकर टिकटें फाइनल करती है, जिसमें छंटनी के हर स्टेज पर प्रदेश की सीनियर लीडरशिप के साथ आम राय बनाई जाती है। सूत्रों के अनुसार आंतरिक सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
परिवर्तन यात्रा के दौरान भी विधानसभाओं की समीक्षा रिपोर्टें तैयार की गई हैं। प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू और राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश भी लगभग सभी विधानसभाओं की बैठकें कर चुके हैं। जिनकी बनाई रिपोर्ट बेहद अहम मानी जाती है।
अब केंद्रीय नेतृत्व ने सांसदों से भी अपने लोकसभा क्षेत्र में आने वाली विधानसभाओं में दावेदारों को लेकर रिपोर्ट मांगी है। सांसदों को इसके लिए फार्मेट भी दिया गया है कि दावेदारों का आकलन करने के लिए कौन कौन से फैक्टर देखे जाने हैं। 30 दिसंबर से पहले पार्टी तमाम रिपोर्टें एकत्रित कर प्रत्याशियों का चयन शुरू कर सकती है। स्क्रीनिंग कमेटी में छंटनी के बाद पार्टी संसदीय समिति टिकटों पर अंतिम मुहर लगाएगी।
बदल सकते हैं चुनाव क्षेत्र
कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए दस पूर्व विधायकों का दावा भी टिकटों पर रहेगा, जिससे कुछ सीटिंग विधायकों का क्षेत्र बदलने से लेकर टिकट कटने तक की आशंका जताई जा रही है। अपने सीटिंग विधायकों की जीत की संभावनाओं पर ही पार्टी दोबारा टिकट देती है। वर्ष 2012 में भी कई सीटिंग विधायकों का टिकट काटा गया था। बागियों के आने और सीटिंग विधायकों की खराब रिपोर्ट से गढ़वाल में कुछ फेरबदल की आशंका है।