कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारी संभाल चुके किशोर उपाध्याय ने चुनाव से ठीक पहले भाजपा का दामन थाम लिया। उन्हें पार्टी ने टिहरी से मैदान में उतार भी दिया। उनकी लड़ाई कांग्रेस के धन सिंह नेगी और उत्तराखंड जनएकता पार्टी के प्रत्याशी दिनेश धनै से है। इस त्रिकोणीय मुकाबले के नतीजे आने के साथ ही किशोर के भविष्य का रास्ता भी साफ होगा।
2002 के पहले चुनाव, 2012 और फिर 2017 में सुबोध जीते
उत्तराखंड के चार विधानसभा चुनावों में से तीन बार नरेंद्रनगर विधानसभा सीट पर सुबोध उनियाल ने जीत दर्ज की। 2002 के पहले चुनाव, 2012 और फिर 2017 में सुबोध जीते। इस बार उनके सामने 2007 में इसी सीट पर यूकेडीडी से विधायक रहे ओम गोपाल रावत मैदान में हैं। कांग्रेस ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है। मुकाबला कड़ा है। दस मार्च को सुबोध उनियाल का भविष्य भी खुलेगा।
मिथक रहा है कि जो भी शिक्षा मंत्री बनता है, वह अगला चुनाव नहीं जीतता
उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में एक मिथक यह रहा है कि जो भी शिक्षा मंत्री बनता है, वह अगला चुनाव नहीं जीतता। 2002 में कांग्रेस के टिकट से पौड़ी चुनाव जीतने वाले नरेंद्र सिंह भंडारी शिक्षा मंत्री बने लेकिन 2007 के चुनाव में पौड़ी सीट पर तीसरे नंबर पर रहे। 2007 में मदन कौशिक शिक्षा मंत्री बने लेकिन 2012 में भी वह जीते। इसके बाद 2012 में देवप्रयाग सीट से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले मंत्री प्रसाद नैथानी को कांग्रेस सरकार ने शिक्षा मंत्री बनाया। लेकिन 2017 के चुनाव में देवप्रयाग सीट से वह हार गए। अब 2017 के चुनाव में अरविंद पांडेय को शिक्षा मंत्री बनाया गया था। 10 मार्च को ही स्पष्ट होगा कि शिक्षा मंत्री के चुनाव हारने का मिथक चलेगा या टूटेगा।
धन सिंह रावत ने इन पांच साल में खूब नाम कमाया
2017 में श्रीनगर से पहली बार विधानसभा पहुंचने वाले डॉ. धन सिंह रावत ने इन पांच साल में खूब नाम कमाया। पहले राज्यमंत्री और फिर कैबिनेट मंत्री होने के साथ ही उनके पास उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य जैसा अहम विभाग रहा। इस बार श्रीनगर सीट पर उनका सामना कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से होना है। अब यह देेखने वाली बात होगी कि नतीजा क्या आएगा।