2022 के चुनावी समर में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के कुछ प्रत्याशियों पर राजनीतिक विरासत को बचाने की चुनौती है। उनके टिकट में उनके राजनीतिक परिवार का चमक की खास भूमिका रही है। इनमें पहला नाम खानपुर सीट से विधायक पति कुंवर प्रणव चैंपियन के स्थान पर प्रत्याशी बनाई गई उनकी पत्नी कुंवरानी देवयानी हैं।
दूसरा नाम कद्दावर राजनीतिज्ञ स्व. डॉ. इंदिरा हृदयेश के सुपुत्र सुमित हृदयेश का है, जो अपनी माता की पारंपरिक सीट हल्द्वानी से ताल ठोक रहे हैं। काशीपुर से उतरे भाजपा के त्रिलोक सिंह चीमा भाजपा विधायक हरभजन सिंह चीमा के बेटे हैं। वह पिता की राजनीतिक विरासत को बरकरार रखने की चुनौती के दबाव में हैं। ठीक ऐसे ही दबाव में विधायक स्वर्गीय हरबंस कपूर की पत्नी सविता कपूर भी हैं, जिन्हें पार्टी ने देहरादून कैंट से मैदान में उतारा है।
पूर्व सीएम मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी की बेटी रितु खंडूड़ी चुनाव लड़ रही हैं। यमकेश्वर से टिकट काटने के बाद पार्टी उन्हें कोटद्वार सीट से उतारा है। काशीपुर से पूर्व सांसद नरेंद्र चंद सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार बनाए गए हैं। कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत की पुत्र वधू भी अपने ससुर की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की हसरत से समर में उतरी हैं और उन्हें भी कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है।
सोमेश्वर में पति-पत्नी एक-दूसरे के खिलाफ
पति और पत्नी के एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में होने से सोमेश्वर विधानसभा के चुनाव की भी चर्चा है। इस सीट पर मधुबाला ने निर्दलीय पर्चा भरा है, जबकि उनके पति बलवंत आर्या भी चुनाव मैदान में हैं। बलवंत आर्या को समाजवादी पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है।