1982 में पहली बार केरल के पारूर विधानसभा उपचुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन तब कोर्ट ने चुनाव को अमान्य करार दे दिया था। तब रिप्रेजेंटशन ऑफ द पीपल्स एक्ट 1951 में ईवीएम का प्रावधान नहीं था। 1988 में यह एक्ट संशोधित हुआ और 1989 से लागू हुआ। इसमें चुनाव आयोग को ईवीएम से चुनाव कराने की शक्ति दी गई।
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बिहार से एम-3 ईवीएम उत्तराखंड आ चुकी हैं। हम 21 से प्रशिक्षण शुरू करने जा रहे हैं। पहली बार यहां के चुनाव में एम-3 ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पहले पिथौरागढ़ और सल्ट विधानसभा उपचुनाव में इस ईवीएम का प्रयोग हो चुका है।
-सौजन्या, मुख्य निर्वाचन अधिकारी