चौबट्टाखाल सीट से यदि कांग्रेस पार्टी हरक सिंह रावत को मैदान में उतारती है तो यह भी हॉट सीट की श्रेणी में आ जाएगी। हरक सिंह रावत का राजनीतिक इतिहास भी सीटें बदलकर चुनाव लड़ने का रहा है। वर्ष 2017 के चुनाव में चौबट्टाखाल सीट पर भाजपा के सतपाल महाराज ने कांग्रेस के राजपाल सिंह बिष्ट को सात हजार से अधिक मतों से हराया था। महाराज को कुल 20 हजार 931 मत प्राप्त हुए थे, जबकि राजपाल को 13 हजार 567 मत प्राप्त हुए थे। खास बात यह है कि इस सीट पर बीते चुनाव में 15 दावेदारों ने किस्मत आजमाई थी। इनमें से 11 प्रत्याशी तो तिहाई के अंक पर ही बमुश्किल पहुंच पाए थे। अब अगर इस सीट पर दो दिग्गज आमने-सामने होते हैं तो मुकाबले के रोचक होने के आसार हैं।
इस बारे में पार्टी हाईकमान के स्तर से बात हुई है। लेकिन अभी कुछ भी स्पष्ट नहीं है। एक-दो दिन में सारी बातें स्पष्ट हो जाएंगी।
- गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
हरक के समर्थक माने जाने वाले काऊ बोले- जहां जरूरत हुई साथ दिया, जो उन्होंने चाहा वो मिला
रायपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ ने कहा कि यह जनता बताएगी कि पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने सही किया या गलत। उन्होंने कहा कि उनका अनुभव बेशक कम है, लेकिन वह जानते हैं कि सही क्या है और गलत क्या है? भाजपा से निकाले जाने से पहले नई दिल्ली में उमेश शर्मा पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के साथ थे। उमेश शर्मा 2016 में कांग्रेस से बगावत कर भाजपा में शामिल होने वाले नौ विधायकों में से एक थे। पिछले पांच साल के दौरान उन्हें हरक सिंह रावत के साथ एक कट्टर समर्थक के तौर पर देखा गया। जब-जब पार्टी में उमेश असहज हुए, हरक सिंह रावत उनके लिए ढाल बने। ठीक ऐसे ही उमेश भी हरक सिंह रावत के साथ हर वक्त खड़े नजर आए।
इसीलिए हरक सिंह रावत के अकेले कांग्रेस में जाने और उमेश के भाजपा में बने रहने को लेकर भी सियासी हलकों में खूब चर्चाएं हैं। हरक सिंह रावत ने संकेतों में उमेश पर तंज किए हैं। शनिवार को मीडियाकर्मियों ने इससे जुड़े सवाल उमेश शर्मा से पूछे तो उनका कहना था, किसने क्या कहा, किसने नहीं कहा, ये सब तो इतिहास बन गया है। इस पर जाने की जरूरत नहीं। अब उनका दल अलग है। विचारधारा बदल गई। अब उस पर मुझे कुछ नहीं कहना है।उन्होंने कहा कि ये उनका दिल जानता होगा, ईश्वर जानता होगा। सबको पता है कि तीन महीने से जहां भी जरूरत हुई, हमने उनका साथ दिया। जो उन्होंने चाहा, वो उनका मिला।
हरक सिंह रावत के भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने के सवाल पर काऊ ने कहा कि क्या एक ही परिवार के दो लोग आपस में नहीं लड़ते। मेरा भाई चुनाव में आएगा तो और बढ़िया मुकाबला होगा। क्या हरक सिंह की चुनाव में हार होगी, इस प्रश्न पर काऊ ने कहा कि न मैं हराने वाला न जिताने वाला। जनता जवाब देगी। हरक सिंह को लेकर उन्होंने कहा कि हम छोटे हैं, अनुभव में भी कम हैं, लेकिन सही क्या है और गलत क्या है, इतना तो हम जानते हैं। हमने अपने साथी को बहुत समझाने की कोशिश की। उन्होंने मेरा भी पूरा सम्मान किया। कई बार उन्होंने मेरी बात भी मानी। लेकिन आखिर शायद ईश्वर को इतना ही मंजूर था। उनका फैसला सही है या गलत ये तो जनता ही बताएगी, मैं नहीं बता सकता।
ऐसा क्या हुआ कि हरक सिंह आपसे जुदा हो गए, इसके जवाब में काऊ ने कहा कि हम उस दिन जैसे ही दिल्ली की सीमा पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि घर जाना है। मैं सदन की ओर चला गया। जब तक हम किनारे होते तो न्यूज आ गई। उन्होंने कहा कि वह जहां भी रहें, ईश्वर उनका भविष्य उज्ज्वल रखे। हमने उन्हें समझाने का बहुत प्रयास किया।