70 सदस्यीय विधानसभा की 70वीं सीट है खटीमा। आखिरी नंबर की यह सीट प्रदेश की मौजूदा सियासत की धुरी है। उत्तराखंड राज्य के पांचवें चुनाव में खटीमा सबसे वीआईपी सीट है। लगातार दो बार इस सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले पुष्कर सिंह धामी को छह महीने पहले मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली और वह इस सीट से लगातार तीसरी बार प्रत्याशी बनाए गए हैं। जीत की तिकड़ी के लिए मैदान में उतरे धामी के सामने चुनौती सीधी है।
भाजपा और कांग्रेस में आमने-सामने की टक्कर है। दोनों दल दो-दो बार इस सीट को जीत चुके हैं लेकिन इस बार बसपा और आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन इस वीआईपी सीट के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। जातीय रूप से यहां क्षत्रिय वोटर सबसे ज्यादा होने के बावजूद राणा और अल्पसंख्यक वोटरों की भूमिका खासी अहम है और इस बार राणा और मुस्लिम बिरादरी के प्रत्याशी भी मैदान में हैं।
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नेपाल सीमा से लगी खटीमा विधानसभा सीट नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट का हिस्सा है। इस लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले अजय भट्ट मोदी सरकार में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री हैं। सीएम धामी को चुनौती देने वाले कांग्रेस के प्रत्याशी भुवन चंद्र कापड़ी प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। दोनों दिग्गज नेता मूल रूप से एक ही जिले (पिथौरागढ़) के निवासी भी हैं। भाजपा संसाधन और प्रचार तंत्र में दूसरे दलों से बहुत आगे है और अब उसकी पूरी कवायद पार्टी के अलग-अलग धड़ों को एकजुटता के साथ चुनाव में उतारने की है।
कांग्रेस खटीमा के विकास, शिक्षा और युवाओं के मुद्दों को जोरशोर से उठाकर मतदाताओं को लुभाने का प्रयास कर रही है। यद्यपि तीन केंद्रीय कृषि कानूनों की वापसी के बावजूद तराई के किसानों की तरह ही यहां इसकी खूब चर्चा है, लेकिन इस सीट पर सबसे बड़ा मुद्दा काबिज जमीन पर स्वामित्व का है। विधानसभा के पिछले दोनों चुनाव में बसपा के रमेश सिंह राणा ने दमदार प्रदर्शन किया था। इस बार उनके अलावा पहली बार उतरी आम आदमी पार्टी के सिख प्रत्याशी के प्रदर्शन पर दोनों दलों की नजरें हैं।
संक्षिप्त इतिहास
2002 और 2007 में कांग्रेस के गोपाल सिंह राणा विधायक बने जबकि 2012 और 2017 में भाजपा के पुष्कर सिंह धामी यहां के विधानसभा में प्रतिनिधि चुने गए।
परिसीमन से पहले आरक्षित थी सीट
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद खटीमा सीट शुरुआत के दो चुनावों 2002 और 2007 में अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित थी। इसके बाद हुए परिसीमन में खटीमा सीट को अनारक्षित कर दिया गया। खटीमा से कटकर बनी दूसरी सीट नानकमत्ता को एसटी जाति के लिए आरक्षित किया गया।
चुनाव हार चुके हैं दो सीएम
उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में अब तक दो सीटिंग मुख्यमंत्री चुनाव हार चुके हैं। खंडूरी हैं जरूरी... नारे के बीच 2012 के चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी कोटद्वार से खुद चुनाव में शिकस्त खा बैठे। इसी तरह 2017 में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव हार गए। हारे दोनों मुख्यमंत्रियों ने अपने निर्वाचन क्षेत्र को बदला था।
खटीमा सीट पर मतदाता:
कुल वोटर:119980
पुरुष: 60797
महिलाएं: 59178
थर्ड जेंडर: 5
प्रमुख स्थानीय मुद्दे
जमीन पर स्वामित्व, खटीमा जिला निर्माण, नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों का विकास, शहर की जाम की समस्या, बरसात में जल भराव, सीवर लाइन निर्माण, जंगल-खत्ते-वन-नदी-नालों के आसपास रहने वालों के हक-हकूक।
खटीमा सीट से प्रत्याशी
भाजपा: पुष्कर सिंह धामी
कांग्रेस: भुवन चंद्र कापड़ी
आप: एसएस कलेर
सपा: विजयपाल
बसपा: रमेश सिंह
भारतीय सुभाष सेना: राजेश
एआई मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन: आसिफ मियां
निर्दलीय: बाबू राम
विधानसभा चुनाव 2017 में विभिन्न प्रत्याशियों को मिले वोट
भाजपा: पुष्कर सिंह धामी, 29539
कांग्रेस: भुवन चंद्र कापड़ी, 26830
बसपा: रमेश सिंह राणा, 17804
उक्रांद: अब्दुल फरीद सिद्दकी, 269
सपा: विनोद भट्ट, 115
शिवसेना: अनिल कुमार रस्तोगी, 121
भारतीय सुभाष सेना: भुवाल सिंह कुशवाहा, 156
निर्दलीय: डॉ. ललित सिंह, 4452
निर्दलीय: रमेश चंद्र राणा: 452
निर्दलीय: रमेश कुमार, 215
ये चुनाव काम करने वाले और कारनामे करने वालों के बीच है। हमारा कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है, विपक्ष मुद्दाहीन है। हमने खटीमा में आईटीआई, केंद्रीय विद्यालय, एकलव्य आवासीय स्कूल, सीएसडी कैंटीन, अस्पताल में एमआरआई व अल्ट्रासाउंड मशीन से लेकर ऑक्सीजन प्लांट, मंदिरों का सौंदर्यीकरण सहित विकास के अनेक काम किए हैं। स्टेडियम और बस स्टेशन का निर्माण चल रहा है। 54 किमी का स्टेट हाइवे मंजूर हो गया। सरकार के छह माह में लिए गए 550 फैसलों का लाभ हर वर्ग को मिला है।
- पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री और प्रत्याशी, भाजपा
खटीमा की जनता बड़े कद या बड़े पद के बजाय बड़े काम को पसंद करती है। भाजपा इस सीट पर दस साल से काबिज है, लेकिन विकास के नाम पर हाल यह है कि टूटी सड़क और शहर में लगने वाला जाम इसे जामनगर बना रहा है। जलभराव का कोई समाधान नहीं किया गया है। कोरोना के दौरान अस्पतालों में आईसीयू और वेंटिलेटर सफेद हाथी बने रहे। महाविद्यालय में प्रवेश की संख्या को तीन हजार से कम कर 750 करके छात्रों के साथ खिलवाड़ किया गया।
- भुवन चंद्र कापड़ी, प्रत्याशी, कांग्रेस
खटीमा को जिला बनाने की दो दशक से मांग होती रही, लेकिन खटीमा से मुख्यमंत्री मिलने के बावजूद इसे पूरा नहीं किया जा सका, जबकि उप्र के दौरान बसपा राज में बहिन मायावती के नेतृत्व में वर्तमान उत्तराखंड में तीन नए जिले बनाए गए। जमीन की समस्या का मिल बैठकर समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। आरक्षित वर्ग के बैकलॉग पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा, एससीपी और टीसीपी के क्रियान्वयन को बेहतर किया जाएगा। जंगलों, खत्तों, वनों और नदी-नालों के पास वाले लोगों को हक दिलाया जाएगा।
- रमेश सिंह राणा, प्रत्याशी, बसपा
दोनों मुख्य दल जब विपक्ष में होते हैं, महंगाई पर शोर मचाते हैं, लेकिन महंगाई कम करने के लिए दोनों के पास न कोई नीति है और ना ही कोई नीयत। आम आदमी पार्टी आम जन से जुड़े मुद्दों को लेकर संजीदा है। आप शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, साफ पानी जैसी सुविधा लोगों को उपलब्ध कराने के लिए काम करेगी। दिल्ली में केजरीवाल सरकार की ईमानदारी पर टिके इस मॉडल से हर गरीब का भला हुआ है। किसानों के लिए मंडी की व्यवस्था को बेहतर कर उन्हें मजबूत करेंगे।
- एसएस कलेर, प्रत्याशी, आम आदमी पार्टी