विधानसभा चुनाव की तैयारी की शुरुआत एक परिवार-एक टिकट के दावे के साथ करने वाली कांग्रेस इससे पीछा नहीं छुड़ा पाई। खुद जिन पूर्व सीएम हरीश रावत के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जा रहा है, उनकी ही बेटी को टिकट दे दिया गया। हालांकि युवाओं के मामले में कांग्रेस ने अपने युवा कांग्रेस संगठन पर भरोसा जताया है। महिलाओं के नजरिए से देखें तो कांग्रेस इस बार पांच महिलाओं पर भरोसा जता पाई है जबकि दो महिलाओं के नाम की घोषणा करने के बाद उन्हें सूची से हटा दिया गया।
कांग्रेस ने हरिद्वार ग्रामीण में पूर्व सीएम हरीश रावत की बेटी अनुपमा रावत, मसूरी में गोदावरी थापली, भगवानपुर में ममता राकेश, रुद्रपुर से मीना शर्मा औ लैंसडोन से अनुकृति गुसाईं को टिकट दिया है। जबकि हरिद्वार जिले की ज्वालापुर सीट पर बरखा रानी और लालकुआं सीट पर संध्या डालाकोटि का टिकट देने के बाद नाम वापस ले लिया गया। भाजपा की आठ महिला प्रत्याशियों के मुकाबले कांग्रेस ने पांच महिलाओं को टिकट दिए। युवाओं पर भरोसे की बात करें तो कांग्रेस ने दो टिकट युवाओं को दिए हैं। इनमें युवा कांग्रेस कोटे से जयेंद्र चंद रमोला को ऋषिकेश सीट से और ज्वालापुर से रवि बहादुर को टिकट दिया गया।
परिवारवाद के मामले में कांग्रेस न तो को एक परिवार-एक टिकट के सिद्धांत का पालन कर पाई और न ही परिवारवाद से छुटकारा हासिल कर पाई। कैंट सीट पर वैभव वालिया और अभिनव थापर भी युवा कोटे से टिकट चाह रहे थे, लेकिन उनके अरमान पूरे नहीं हो पाए। पूर्व सीएम हरीश रावत लालकुआं से लड़ेंगे जबकि उनकी बेटी अनुपमा रावत हरिद्वार ग्रामीण सीट से चुनाव मैदान में उतारी गई है।
इसके अलावा यशपाल आर्य बाजपुर से लड़ेंगे जबकि उनका बेटा संजीव आर्य नैनीताल से चुनाव मैदान में है। पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा के बेटे नरेंद्र चंद सिंह को पार्टी ने काशीपुर से टिकट दिया है। लैंसडोन विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री व वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत की पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं को टिकट दे दिया है। कुल मिलाकर देखें तो परिवारवाद की छाया से कांग्रेस भी बच नहीं पाई।