पहले सेवा मंडल करता था भर्तियां
देहरादून। सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की नियुक्ति पूरे देश में सेवा मंडल की ओर से की जाती है। लेकिन उत्तराखंड में वर्ष 2003-04 में तत्कालीन सरकार ने सेवा मंडल को बाईपास करते बैंकों के बोर्ड को यह अधिकार दे दिया। इसमें 50 नंबर का साक्षात्कार रखा गया, ताकि मनमानी की जा सके। लेकिन हमारी सरकार में पारदर्शिता लाते हुए अंकों को अलग-अलग आधार पर बांटा गया।
इसके तहत हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी अभ्यर्थी को 15 अंक, द्वितीय को 13 अंक, तृतीय को 11 दिए जाने की व्यवस्था की। इसके अलावा बैंकों में पहले से आउटसोर्स पर काम कर रहे अभ्यर्थियों का दस अंकों का अधिमान दिया गया। खेलों में राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों को पांच से तीन और शारीरिक दौड़ पर दस अंक देने की व्यवस्था की गई। जबकि साक्षात्कार के लिए दस अंक देने की व्यवस्था की गई।
433 पदों के लिए आए 47 हजार आवेदन
देहरादून। मंत्री डॉ. धन सिंह ने बताया कि सहकारिता में 433 पदों के सापेक्ष 47 हजार से ज्यादा आवेदन आए थे। इनमें उप महाप्रबंधक के 10, कनिष्ठ सहायक प्रबंधक के 22, कनिष्ठ सहायक प्रबंधक वर्ग दो के 104 और लिपिक के 297 पद भरे गए। उन्होंने कहा कि पहली बार सहकारिता में आईबीपीएस के माध्यम से ऑनलाइन परीक्षा कराई गई। 40 दिन के भीतर परीक्षा का परिणाम भी घोषित कर दिया गया।
हमने सहकारिता में भर्ती घोटाले की एसआईटी जांच की मांग की थी। वह चाहे किसी भी कार्यकाल में हुई हों। सबकी जांच होनी चाहिए। सरकार ने एसआईटी जांच की घोषणा की है। उम्मीद है कि आने वाले समय में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - प्रीतम सिंह, विधायक