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विवादों में घिरा उत्तराखंड का राज्यगीत, घोषणा से पहले हुआ लीक

Sat, 07 Nov 2015 11:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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स्थायी राजधानी की तरह प्रदेश का प्रस्तावित राज्यगीत भी विवादों में घिर गया है। इस मामले में एक बार फिर पहाड़ को उसका हक न मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। प्रस्तावित राज्यगीत के लिए अपने ‘बोल’ देने वाले लोग इससे आहत और मायूस हैं। चूंकि मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे गए राज्यगीत में इसके रचनाकार का नाम सामने नहीं आया है, इसलिए इसकी मौलिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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प्रदेश सरकार ने इसी साल राज्यगीत बनाने के लिए साहित्यकार डॉ. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’ की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय चयन समिति बनाई। प्रख्यात गढ़वाली लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी इसके सह अध्यक्ष हैं।

इस समिति ने करीब छह माह पहले विज्ञापन देकर प्रस्तावित राज्यगीत के लिए रचनाएं आमंत्रित की थीं जिसमें देशभर से 200 से अधिक गीतकारों ने अपनी रचनाएं भेजी थीं।  तब बताया गया था कि राज्यगीत की शुरुआत बेशक हिंदी से होगी, लेकिर गढ़वाली और जौनसारी आदि लोकभाषाओं के शब्द भी शामिल किए जाएंगे, लेकिन बताया जा रहा है कि जिस प्रस्तावित राज्यगीत को समिति ने अपनी संस्तुति दी है वह हिंदी में है।
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नाम सामने न आने से इसे शब्द देने वाले मायूस

इस पर अपने सुझाव तथा प्रस्तावित गीत को अपने बोल देने वाले कई लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हल्द्वानी के ग्राम मल्ला लोहरियासाल कठघरिया निवासी ललित मोहन सिंह जीना ने भी अपनी कृति भेजी थी।

उनका कहना है कि उन्होंने भी 20 मई को प्रस्तावित राज्यगीत के लिए 22 पंक्तियों की रचना भेजी थी, जिसकी धुन ‘बेडू पाको बारोमासा’ गीत पर आधारित थी। इस कृति का अधिकतर भाव समिति द्वारा संस्तुत गीत में शामिल है, लेकिन समिति ने फिलहाल संस्तुत राज्यगीत के रचनाकार का नाम उजागर नहीं किया है, जिसे श्री जीना ने जनभावनाओं की अनदेखी बताया।

राज्य आंदोलनकारी हुकम सिंह कुंवर ने भी राज्यगीत के संभावित स्वरूप पर आश्चर्य जताया है। उन्होंने कहा कि राज्यगीत पूर्व घोषित मानकों के आधार पर ही होना चाहिए जबकि ऐसा नहीं दिख रहा है।
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गीत जो सीएम ऑफिस से हुआ लीक

चयन समिति की सफाई
संस्तुत गीत संशोधित है। इसमें झोड़े को ‘झ्वाड़’ लिखा गया है। काम के साथ ‘धाण’ शब्द जुड़ा है। धुन बनाते समय और भी बदलाव हो सकते हैं। पूरा बिंब समिति की सहमति से तय होगा। संगीत से ही राज्यगीत में पूर्णता आएगी। हालांकि मुझे हैरानी है कि यह प्रस्तावित राज्यगीत कैसे मुख्यमंत्री कार्यालय से लीक हुआ।
-डॉ. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’, अध्यक्ष राज्यगीत चयन समिति।

गीत जिस पर उठे सवाल
उत्तराखंड की देवभूमि जै, शत-शत तेरा अभिनंदन।
दर्शन, संस्कृति, धर्म, साधना, श्रम रंजित तेरा कण-कण
उत्तराखंड ...।
गंगा-यमुना तेरा आंचल, दिव्य हिमालय तेरा शीश,
सब धर्मों की छाया तुझ पर, चार धाम देते आशीष,
श्री बदरी-केदार नाथ हैं कलियर, हेमकुंड पावन
उत्तराखंड ...।
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