राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल मोदी के भरोसेमंद लोगों में शामिल हैं।
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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बाद मोदी राज में एक और उत्तराखंडी, लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट को डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) जैसे अहम पद पर नियुक्ति को लेकर उत्तराखंड के लोग गदगद हैं।
पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक को सफलतापूर्वक अंजाम देने में अहम भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट को डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) जैसे अहम पद पर नियुक्त किया गया है।
अपने कार्यकाल के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट के नेतृत्व में भारत ने पीओके में पांच अलग-अलग स्थानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। उन्हें डीजीएमओ की जिम्मेदारी मिलने पर उत्तराखंड और टिहरी उनके पैतृक गांव में खतवाड़ में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है।
पांच दशक से मसूरी में रह रहा परिवार
एके भट्ट को मेजर जनरल रहते हुए अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।
लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर ब्लॉक के खतवाड़ गांव निवासी हैं। उनका परिवार पिछले पांच दशक से अधिक समय से मसूरी में निवास कर रहा है।
भट्ट ने प्रारंभिक शिक्षा मसूरी के हेंपटनकोर्ट और 12वीं तक की पढ़ाई प्रतिष्ठित कान्वेंट स्कूल सेंट जार्ज कॉलेज में की है। एके भट्ट के पिता सत्यप्रसाद भट्ट ने भी कई वर्षों तक फौज में रहकर देश की सेवा की। उनके बहनोई एसए बडोला भी मर्चेंट नेवी में हैं।
अनिल कुमार भट्ट के दोस्त और सहपाठी विंकी का कहना है कि वे शुरू से ही मेधावी थे। देश सेवा की ललक स्कूल से ही थी। एके भट्ट मसूरी में बेहद लोकप्रिय क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में भी जाने जाते हैं।
मसूरी में हुआ था सम्मान
मसूरी के रोटरी क्लब में अनिल कुमार भट्ट
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लेफ्टिनेंट जनरल बनने से पहले जून 2015 में मसूरी रोटरी क्लब की ओर से उनका सम्मान किया गया था। उनके गांव खतवाड़ में जैसे ही पता चला कि वे डीजीएमओ बन गए, वहां खुशी की लहर दौड़ पड़ी। हालांकि, उनके पैतृक गांव में इस समय तीन-चार परिवार ही रहते हैं। पर सभी खुश नजर आए।
इसके अलावा कीर्तिनगर विकास समिति और लोस्तु बडियार गढ़ के प्रवासियों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई। लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट की माता का पिछले साल ही निधन हो गया था। तब से उनके पिता सत्यप्रसाद भट्ट दिल्ली में ही रहते हैं।
स्थानीय लोगों को जब यह खबर पहुंची कि भट्ट डीजीएमओ बन गए तो लोग बधाई देने घर पहुंचे। लेकिन ऐलसपेथ में ताला लटका होने से उन्हें निराश होना पड़ा। अनिल के छोटे भाई सुनील भट्ट भी देश की प्रमुख कंपनी टीसीएस में कार्यरत हैं।