आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने अंतिम दिनों में भी उनकी सुध नहीं ली। वहीं, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी, महासचिव रामलाल खंडूड़ी, मोहन सिंह रावत, राकेश नौटियाल, ओमी उनियाल, अंबुज शर्मा, सुलोचना भट्ट, राकेश थपलियाल, विजयेश नवानी, जीतपाल बड़थ्वाल, पूर्ण सिंह लिंगवाल, संजय पुंडीर, भानू रावत, योगेश भट्ट, रविंद्र जुगरान, यशवंत रावत, चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी पांडे सहित विभिन्न आंदोलनकारियों और संगठनों ने उनके निधन पर शोक जताया है।
राज्य आंदोलनकारियों को नहीं मिल पाई सूचना
प्रदीप कुकरेती ने बताया कि बमराड़ा को भूख न लगने संबंधित दिक्कतें थी। लंबे समय से उनका इलाज चल रहा था। कहा कि उनके निधन की आंदोलनकारियों को भनक नहीं लग पाई। कहा कि प्रशासन की ओर से आनन फानन में उनका शव हरिद्वार ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अंतिम संस्कार के लिए शव को हरिद्वार ले जाने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट ने दून अस्पताल की ओर से वाहन की व्यवस्था करने को कहा, लेकिन नियमानुसार अस्पताल से वाहन नहीं दिया जा सकता, ऐसे में उन्होंने किसी अन्य अस्पताल से वाहन की व्यवस्था करा उसे तेल के लिए एक हजार रुपये दिए। जबकि शहर कोतवाल ने कर्मकांड के लिए दो हजार रुपये एवं तहसीलदार की ओर से भी कुछ धनराशि दी गई।
-डा.केके टम्टा, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक दून अस्पताल