अभिज्ञान शकुंतलम् समेत पुराणों में भी कण्वाश्रम का वृतांत
कण्वाश्रम का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। हजारों वर्ष पूर्व पौराणिक युग में जिस मालिनी नदी का उल्लेख किया गया है। इतिहासकार बताते हैं कि कण्वाश्रम शिवालिक की तलहटी में मालिनी के दोनों तटों पर स्थित छोटे-छोटे आश्रमों का प्रख्यात विद्यापीठ था। यहां मात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा थी। एक जमाने में यहां से बद्रीकेदार की पैदल यात्रा होती थी। हरिद्वार, गंगाद्वार से कण्वाश्रम, महाबगढ़, ब्यासघाट, देवप्रयाग होते हुए चारधाम यात्रा अनेक कष्ट सहकर पूर्ण की जाती थी। ''स्कंद पुराण'' केदारखंड के 57वें अध्याय में भी इसका उल्लेख है।
पर्यटन विकास योजना पर हाईकोर्ट से लगी है रोक, 2019 से बंद पड़ा है काम
कांग्रेस शासनकाल में मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार कण्वाश्रम में झील निर्माण की सैद्धांतिक सहमति प्रदान करते हुए करीब तीन हेक्टेयर वन भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित की गई थी। इसमें से करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र में जहां झील प्रस्तावित है। वहीं झील के किनारे पैदल पथ, पार्किंग, कैंटीन सुविधाएं और चिल्ड्रन पार्क बनाया जाना प्रस्तावित था। तत्कालीन राज्य सरकार ने इसके लिए एडीबी से बजट उपलब्ध कराया था। सरकार बदलने के बाद दिसंबर 2018 में भाजपा सरकार ने योजना का शिलान्यास किया। लेकिन पार्क और झील से नदी की धारा के अवरुद्ध होने की आशंका पर दायर एक जनहित याचिका के बाद 2019 से उक्त कार्य पर रोक लगी हुई है।