402 में से मात्र 367 नहरों में रह गया पानी
सुगंधित बासमती और चाय बागान के लिए दुनियाभर में पहचान रखने वाले दून में राज्य गठन के 24 सालों में चली बदलाव की बयार ने सबकुछ बदलकर रख दिया है। फसलों से लहलहाने वाले खेतों में आसमान छूती इमारतें खड़ी हो गई हैं। व्यापारिक प्रतिष्ठान, होटल, आवास, शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण से खेती योग्य जमीन का क्षेत्रफल तेजी घटता जा रहा है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिले में 402 में से 367 चलित नहरों के जरिये 16,800 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर सिंचाई की जा रही है। 2,599 किलोमीटर लंबी नहरें जिले के किसानों के लिए वरदान बनी हैं। जबकि, ट्यूबबेलों के जरिये भी किसान खेती कर रहे हैं। बीते 24 वर्षों में 35 नहरें पूरी तरह से सूख गई हैं या इन पर अतिक्रमण हो गया है। वहीं, जोत की घटते दायरे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018 के मास्टर प्लान में दून में 40 प्रतिशत कृषि भूमि दर्शाई गई थी, लेकिन वर्तमान मास्टर प्लान में मात्र 10 प्रतिशत ही कृषि भूमि दर्शाई गई हैं। यानी विगत पांच सालों में 30 प्रतिशत कृषि भूमि कम हो गई है। ऐसे में तेजी से घटता जोत का रकबा चिंता का विषय बना हुआ है।