- सुनीता सिंह : शार्प मेमोरियल स्कूल फोर ब्लाइंड राजपुर रोड में शिक्षिका हैं, जो 100 फीसदी दिव्यांग हैं। शारीरिक रूप से परेशानियों के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी और शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के जीवन को संवारने की ठानी।
- मनदीप कौर : एक पैर से 75 फीसदी दिव्यांग हैं। वर्ष 2017 में नेशनल आर्म रेसलिंग में प्रथम रही। राज्य स्तरीय बैडमिंटन में भी स्वर्ण पदक जीता। हर किसी को प्रतिभा से प्रभावित किया।
- पंकज राणा : राणा ने इंटरनेशनल ब्लाइंड फुटबॉल में देश का नाम रोशन किया है। पंकज इंडियन ब्लाइंड फुटबॉल टीम के कप्तान भी हैं। उनके नाम कई रिकॉर्ड भी हैं। पंकज 100 फीसदी दृष्टि दिव्यांग हैं, जो एनआईईपीवीडी के छात्र हैं।
- रमेश चंद तिवारी : रमेश पैर से 45 फीसदी दिव्यांग हैं। वह आटा चक्की का व्यवसाय कर रहे हैं। व्यवसायी के रूप में उन्होंने खास पहचान बनाई है और अन्य के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।
- भुवन चंद्र गुणवंत : भुवन दोनों पैरों से 100 फीसदी दिव्यांग हैं। वह साइबर कैफे संचालित कर अपनी जीविका चला रहे हैं। उन्होंने चुनौतियों को हमेशा अवसर के रूप में लिया।
- मिन्डा संस्था : सिक्योरिटी से जुड़ी इस संस्था ने मूक-बधिर व अन्य दिव्यांगों की काबिलियत पर भरोसा करते हुए उन्हें अवसर प्रदान किए।
- नईम अख्तर (चूल्हा रिपेयरिंग की दुकान)
- अकील अहमद खां (पान की दुकान)
- प्रदीप कुमार (कनिष्ठ सहायक)
- सुनीता (डाटा एंट्री ऑपरेटर)
- सीमा पाल (कनिष्ठ सहायक)
- अभिनव गुप्ता (डार्क रूम सहायक)
- सौरभ गुप्ता (वोकेशनल सुपरवाइजर)
- श्याम सिंह नेगी (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी)
- मनोज सरकार (पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी)
- राजीव कुमार (रेसलर, बैडमिंटन खिलाड़ी)
- राजदीप सिंह (बैडमिंटन खिलाड़ी)
- मनोज कुमार जोशी (राष्ट्रीय पदक विजेता)
- नईम अहमद (बॉलीवॉल खिलाड़ी)
- प्रेमा विश्वास (बैडमिंटन खिलाड़ी)
परिवहन निगम की ओर से टाटा कंपनी से खरीदी गई 150 बसों में से कई बसों के लीवर टूटने को लेकर मचे बवाल के बीच आखिरकार परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने पहली बार चुप्पी तोड़ी। एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे परिवहन मंत्री यशपाल आर्य से मीडिया कर्मियों ने टाटा कंपनी की नई बसों के गीयर लीवर में आए दिन उजागर हो रही खामियों को लेकर सवाल पूछे तो उन्होंने कहा कि तमाम नई बसों के संचालन पर रोक लगा दी गई है।
इसके साथ ही अधिकरियों को इस बात की हिदायत दी गई है कि वे बसों की खरीद के एवज में तब तक किसी भी प्रकार का भुगतान न करें, जब तब कि सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट यानी सीआईआरटी के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा तमाम गाड़ियों की जांच करने के साथ ही कोई रिपोर्ट नहीं सौंप दी जाती है। परिवहन मंत्री ने कहा कि गीयर लीवर टूटने की घटनाओं के बीच बसों का संचालन ठीक नहीं था। कारण कि चलती बस के दौरान गीयर लीवर टूटने से हादसा होने का पूरा खतरा था।
परिवहन मंत्री ने कहा कि सीआईआरटी के विशेषज्ञों द्वारा जांच करने व रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रकरण की पूरी गंभीरता से जांच करायी जाएगी। बता दें कि प्रकरण उजागर होने के बाद यह पहला मौका है जब परिवहन मंत्री ने इस संबंध में अपना कोई बयान जारी किया है।