उत्तराखंड कुमाऊं के 2000 से कम आबादी वाले करीब 1900 गांव ऐसे भी जहां लोगों को बैंकों से कोई लेना देना नहीं है।
फायदा न होने के नाम पर बैंक इन गांवों तक पहुंचने से कतरा रहे हैं। रिजर्व बैंक के निर्देश पर करीब चार साल पहले घर-घर बैंकिंग का इरादा भी जताया गया था। इस मुहिम का भी खास परिणाम देखने को नहीं मिल रहा है।
शहर ही क्या, अब गांव में भी बिजली, पानी की तरह बैंक रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं। इसके उलट कुमाऊं के छह जिलों में ही करीब 1900 गांव ऐसे हैं, जहां बैंकिंग से लोगों का कोई वास्ता नही है।
यह तब है जबकि बैंकों की ओर से फाइनेंसियल इन्क्लूसशन का नारा दिया जा रहा है। इसका मतलब यह भी है कि बैंक हर व्यक्ति का खाता होने पर जोर दे रहे हैं। बैंक अधिकारियों केमुताबिक कई तरह की समस्याओं के चलते इन छूटे हुए गांवों को बैंकों से जोड़ना मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
पहाड़ के कई गांवों में कनेक्टिविटी ही नहीं है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के मुताबिक इसके लिए बीएसएनएल से भी आग्रह किया जा चुका है। दूसरी ओर बीसी मॉडल का फायदा भी बैंक पूरी तरह से नहीं उठा पा रहे हैं।
कहां क्या है स्थिति
जिला - दो हजार से कम आबादी के गांव - बैंक वाले गांव - बीसी वाले गांव
अल्मोड़ा - 2196 - 907 - 453
बागेश्वर - 856 - 408 - 446
पिथौरागढ़ - 1570 - 229 - 235
चंपावत - 650 - 38 - 612
नैनीताल - 1075 - 46 - 522
ऊधमसिंह नगर - 466 - 36 - 225