राज्यसभा सीट के लिए प्रदीप टम्टा के पक्ष में वोट डालने से पहले कांग्रेसी विधायक उत्तराखंड मुख्यमंत्री हरीश रावत से अपनी बातें मनवा लेना चाहते हैं।
विधायकों को मालूम है कि इसके बाद दबाव बनाने का मौका शायद ही जल्द मिले। इनमें से कई मंत्री पद की दौड़ में हैं तो कई अपने चुनाव क्षेत्र के लिए विकास योजनाएं पाना चाहते हैं।
कुछ विधायक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर लगातार दबाव बनाए हुए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के सामने असल दिक्कत ‘एक अनार, सौ बीमार’ वाली है। मंत्रिमंडल में दो ही सीटें खाली हैं, जबकि मंत्री पद चाहने वालों की तादात करीब एक दर्जन है। एक सीट बागी नेता हरक सिंह रावत के जाने से खाली हुई, दूसरी सुरेंद्र राकेश के निधन के बाद से भरी नहीं गई।
बीते दिनों सरकार के संकट में होने पर कई विधायक मुख्यमंत्री हरीश रावत के पीछे मजबूत सिपाही की तरह खड़े रहे। अब वे इस वफादारी का प्रतिदान मंत्री की कुर्सी के रूप में चाहते हैं। यही कारण है कि नवप्रभात, मयूख महर ने दर्जाधारी लालबत्तियां लेने से इनकार कर दिया। ममता राकेश दलित के साथ-साथ अपने पति की ‘विरासत’ पर दावा कर रहीं हैं।
बसपा विधायक सरवत करीम अंसारी भी पीडीएफ के जरिये मंत्री बनने के लिए दबाव बना रहे हैं। हीरा सिंह बिष्ट, राजेंद्र भंडारी, गणेश गोदियाल भी मंत्री बनने की जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं।
भारी दबाव झेलने के बावजूद मुख्यमंत्री हरीश रावत मंत्रिमंडल विस्तार के लिए तैयार नहीं लग रहे। अपने चुनाव क्षेत्र में विकास कराने को लेकर भी कई विधायक अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले ही यह विधायक अपनी मांगों को मनवाना चाहते हैं।