पिछले सालों के मुकाबले इस बार आग की कम घटनाएं सामने आने के बावजूद वन विभाग को सोशल मीडिया पर खासे दुष्प्रचार का सामना करना पड़ा। यह दुष्प्रचार इतना बढ़ा कि खुद मुख्यमंत्री को कहना पड़ा कि उत्तराखंड के जंगल सुरक्षित हैं और वन विभाग को सोशल मीडिया प्रभारी बनाना पड़ा। वन विभाग के मुताबिक राज्य गठन के बाद से अब तक वनाग्नि के कारण प्रदेश को करीब 1.90 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और करीब 44 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। वर्ष 2003 में जंगल में लगी आग से सबसे अधिक नुकसान हुआ था।
लगातार बारिश और लॉकडाउन का पड़ा फर्क
इस बार वन विभाग को सबसे अधिक राहत फायर सीजन के दौरान हुई बारिश से मिली। मुख्य वन संरक्षक वन अनुसंधान केंद्र संजीव चतुर्वेदी के मुताबिक लगातार बारिश से वनों में नमी बनी रही। वन विभाग के मुताबिक लॉक डाउन की वजह से मानव गतिविधियां भी सीमित रहीं और इसका भी फर्क पड़ा।
सोशल मीडिया पर वनाग्नि के बाद अब अवैध खनन को लेकर जारी मुहिम से वन विभाग परेशान है। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने इस तरह की मुहिम में लगे लोगों को वास्तविकता से परिचित करने और इसके बाद भी मुहिम जारी रहने पर संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने का आदेश दिया है।
वन विभाग को कुछ समय पहले ही वनाग्नि को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार का सामना करना पड़ा था। प्रमुख वन संरक्षक जयराज के मुताबिक इस मामले में 17 व्यक्तियों/संगठनों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। अब वन विभाग को अवैध खनन के मामले में इसी तरह से सोशल मीडिया में निशाना बनना पड़ रहा है। जयराज के मुताबिक बार-बार की तहकीकात में इस तरह के मामले निराधार पाए जा रहे हैं।
इसी को देखते हुए वन अधिकारियों से कहा गया है कि वे सोशल मीडिया में इस तरह का कोई मामला सामने आता है तो अपने स्तर से संचालक को सही जानकारी दें। फिर भी प्रचार जारी रहता है तो संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएं। यह जिम्मा मुख्य वन संरक्षक को दिया गया है कि वे सोशल मीडिया पर विभाग का पक्ष सामने रखेंगे। इसके साथ ही जयराज ने विभाग के फेसबुक पेज को भी अपडेट करने को कहा है।