वन विभाग ने अपनेे कार्यालयों में प्लास्टिक के फर्नीचर पर रोक लगा दी है। इसकी जगह बांस से बने फर्नीचरों का ही उपयोग किया जाएगा। इसी के साथ वन विभाग ने बांस उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए प्रदेश में व्यापक पैमाने पर बांस उत्पादन को मिशन मोड में शुरू करने का फैसला किया है।
मंगलवार को वन मुख्यालय में वन संरक्षकों की कांफ्रेंस के बाद वन मंत्री हरक सिंह ने बताया कि बांस को रोजगार का बेहतर जरिया माना जा सकता है। इसी को देखते हुए प्रदेश में बांस उत्पादन को मिशन मोड में शुरू किया जा रहा है। इसके तहत वन विभाग अलग-अलग तरह के बांसों की नर्सरियों को तैयार करेगा और लोगों को पौध उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही बांस का उपयोग कर कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी शुरू की जाएंगी।
वन मंत्री के मुताबिक वन विभाग में प्लास्टिक के फर्नीचर के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। कोशिश की जाएगी कि यथा संभव बांस से बने फर्नीचर का उपयोग ही किया जाएगा। बैठक में प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
जंगल की आग पर रोकथाम की तैयारी पूरी
कॉफ्रेंस में वनाग्नि पर भी बातचीत हुई। फायर सीजन 15 फरवरी से शुुुरू हो रहा है। संरक्षित वन क्षेत्र में वनाग्नि की रोकथाम को 9.64 करोड़ का बजट है। सिविल सोयम और वन पंचायत में वनाग्नि की रोकथाम को तीन करोड़ से अधिक का बजट है। तय किया गया कि वनाग्नि के मामलों में ग्रामीणों का भी सहयोग लिया जाएगा।
जायका, कैंपा आदि पर भी हुई बातचीत
कॉन्फ्रेंस में जायका, कैंपा आदि योजनाओं को लेकर भी बातचीत हुई। कैंपा में प्रदेश सरकार की ओर से करीब 526 करोड़ रुपये के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इनमें से अधिकतर प्रस्तावों को मंजूरी भी मिल चुकी है। वन मंत्री ने अनुमोदित योजनाओं पर तेजी से काम करने को भी कहा है।
इन पर भी हुआ मंथन
- मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करना
- केंद्र और राज्य सेक्टर की योजनाओं की समीक्षा
- लीसा नीलामी
- पौधरोपण
- गंगा नदी के जल संवर्द्धन क्षेत्र का संरक्षण
- वनाग्नि दुर्घटनाओं की रोकथाम
- वन पंचायतों के तहत किए गए कार्य