दृढ़ संकल्प और धैर्य हो और साथ में कठिन परिश्रम, तो कोई भी मंजिल कठिन नहीं। यह साबित किया है अल्मोड़ा के गुरुरानीखोला निवासी सौम्या गुरुरानी ने। एक बार मुख्य परीक्षा में असफलता, दूसरी बार प्रारंभिक परीक्षा में ही न निकल पाना, उनके हौसले को डिगा नहीं सके।
सौम्या ने धैर्य रखा। कड़ी मेहनत की और आखिरकार तीसरे प्रयास के तहत बुधवार को यूपीएससी परीक्षा परिणाम निकला तो वह 148वीं रैंक के साथ सफलता के शिखर पर थीं। अपनी सफलता का ये राज खुद सौम्या बताती हैं और युवाओं के लिए यही उनका संदेश भी है।
यहां एसबीआई की मुख्य शाखा में उप प्रबंधक नवीनचंद्र गुरुरानी और हवालबाग के महेला जूनियर हाइस्कूल की शिक्षिका नमिता गुरुरानी की बेटी सौम्या शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहीं। उन्होंने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा कुर्मांचल एकेडमी अल्मोड़ा से हासिल की। इसके बाद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग रुड़की से 2013 में आईटी में बीटेक किया।
उनका सेलेक्शन एक मल्टीनेशनल कंपनी में हो गया था लेकिन इरादा था प्रशासनिक सेवा में जाने का, सो कंपनी ज्वाइन नहीं की। कुछ समय सिविल सेवा परीक्षा के लिए दिल्ली में कोचिंग ली। यूपीएससी की पहली परीक्षा उन्होंने 2014 में दी जिसमें वह मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो सकीं। 2015 में दूसरे प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा से ही पार नहीं पा सकीं।
इससे उनको कुछ निराशा तो हुई लेकिन उन्होंने इसे खुद पर हावी होने नहीं दिया और घर लौटकर पूरे हौसले के साथ तैयारी में जुट गईं। तीसरे प्रयास में अंतत: सफलता ने उनके कदम चूम लिए। यूपीएससी के लिए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन को वैकल्पिक विषय चुनने वाली सौम्या का कहना है कि शुरुआत में वह 8-10 घंटे पढ़ाई करती थी लेकिन बाद के वर्षों में उन्होंने पांच-छह घंटे ही पढ़ा। अंतिम प्रयास के लिए उन्होंने दो साल घर पर ही रहकर तैयारी की।
सौम्या के अनुसार कठिन परिश्रम, धैर्य और दृढ़ संकल्प ही सफलता के मूल मंत्र हैं। वह सफलता का श्रेय माता-पिता के अलावा ताऊ रमेश चंद्र गुरुरानी, जीजा एसपी सिटी हल्द्वानी अमित श्रीवास्तव और टीसीएस में इंजीनियर भाई गौतम गुरुरानी और कुर्मांचल एकेडमी के शिक्षकों के मार्गदर्शन को भी सफलता का श्रेय देती हैं। उनका कहना है कि सिविल सेवक के रूप में जो भी जिम्मेदारी मिलेगी पूरी ईमानदारी से निर्वहन करेंगी।