उत्तराखंड पूर्वसैनिक कल्याण निगम (उपनल) के एमडी पद पर इंटरव्यू के बाद मेरिट लिस्ट तो बनी लेकिन नियुक्ति आदेश की फाइल सीएम हरीश रावत के स्तर पर अटक गई है।
मंगलवार को मौजूदा एमडी ब्रिगेडियर अजय नंद बहुगुणा का कार्यकाल पूरा हो गया, लेकिन शासन की ओर से इस संबंध में अवगत कराने के बावजूद नियुक्ति के आदेश की फाइल नहीं मिली। मेरिट लिस्ट के आधार पर चयन की फाइल पर अनुमोदन नहीं मिलने से सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह के चलते निगम सरकार के टारगेट पर है। कुछ अधिकारियों को पहले भी निगम से सरकार के आदेश पर हटाया जा चुका है। उपनल की एमडी की कुर्सी 30 अगस्त को खाली हो गई। एक वर्ष से सेवा विस्तार पर चल रहे एमडी ब्रिगेडियर बहुगुणा का अनुबंध कार्यकाल समाप्त हो गया।
सरकार ने उन्हें सेवा विस्तार देने के बजाय नए एमडी की तैनाती का निर्णय लिया था। इसी माह एमडी पद के लिए इंटरव्यू आयोजित किए गए। ब्रिगेडियर रैंक के कई अधिकारी साक्षात्कार में शामिल हुए, जिसके आधार पर मेरिट लिस्ट भी बनी।
मेरिट लिस्ट के आधार पर नियुक्ति के लिए दो सप्ताह पहले फाइल सीएम हरीश रावत को अनुमोदन के लिए भेजी गई थी, लेकिन अभी तक अनुमोदन नहीं मिला। शासन स्तर से सीएम कार्यालय को इस बाबत अवगत भी कराया गया कि पद 30 अगस्त को रिक्त हो जाएगा, लेकिन सीएम की संस्तुति अभी तक नहीं आई। अभ्यर्थी भी दबी जुबान में सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
मेरिट लिस्ट तो नहीं वजह
एमडी पद के लिए साक्षात्कार मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता वाली जिस कमेटी ने किया है, उसमें शासन और केंद्र से ब्रिगेडियर रैंक का एक अधिकारी भी शामिल था। चयन प्रक्रिया के बाद तैयार हुई मेरिट में इन सभी अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। ऐसे में मेरिट लिस्ट से छेड़छाड़ करने का जोखिम उठाना आसान नहीं है। सूत्रों की मानें तो मेरिट लिस्ट पर ही पेच फंसा है।