दो बरस से उत्तराखंड सरकार की अनदेखी झेल रहे उपनल कर्मचारियों ने आंदोलन पर जाने का एलान किया है। नौ मार्च को साढ़े सोलह हजार उपनल कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे। इससे पहले उपनल कर्मचारियों के हुए आंदोलन के बाद सीएम हरीश रावत ने वेतन वृद्धि का आश्वासन तो दिया, लेकिन फाइल शासन में अटकी हुई है।
उपनल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष भावेश जगूड़ी ने परेड ग्राउंड में आयोजित बैठक में साफ किया कि कर्मचारी अपनी अनदेखी को अब और नहीं सहेंगे। जुलाई 2015 में उपनल कर्मचारी महाधिवेशन में सीएम ने घोषणा की थी वेतन वृद्धि के साथ, महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश, निकाले कर्मचारियों को तत्काल बहाली की जाएगी।
पांच वर्ष से अधिक सेवाओं में कार्यरत कई कर्मचारियों को श्रम सेवायोजन, उच्च शिक्षा, सेवायोजन, आईटीआई आदि अनेक विभागों से निकाला गया है। संघ के उपाध्यक्ष कुशाग्र जोशी ने कहा कि इस बार वह उग्र आंदोलन करेंगे। सात सूत्रीय मांगों को लेकर हमारा आंदोलन चलेगा। आंदोलन तभी समाप्त होगा जब मांगों से संबंधित शासनादेश जारी होंगे।
शासन में अटकी हैं फाइलें
ऐसे नहीं है सरकार ने उपनल कर्मचारियों की वेतन वृद्धि सहित अन्य मांगों पर विचार नहीं किया। सीएम के निर्देश केबाद प्रस्ताव बने तो जरूर लेकिन शासन स्तर पर उनका निस्तारण नहीं हुआ। वेतन वृद्धि, मातृत्व अवकाश, बोनस तीनों मामलों के प्रस्ताव शासन में विचाराधीन हैं। दो दिन पहले हुई कैबिनेट बैठक में तो जब शासन ने प्रस्ताव नहीं रखे तो मंत्री हरक सिंह ने इन मुद्दों को उठाया।