उत्तर प्रदेश के 19 पीसीएस अफसरों को अब उत्तराखंड का रुख करना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इन अधिकारियों की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी है। याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने की।
राज्य बंटवारे के बाद आना था उत्तराखंड
उल्लेखनीय है कि राज्य बंटवारे के बाद बड़ी संख्या में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों के कैडर का भी बंटवारा हुआ था। जिन 42 पीसीएस अफसरों को इसके तहत उत्तराखंड आना था उनमें से 19 का मामला लंबित था।
यूपी-उत्तराखंड के बीच चल रहे विवाद की बाबत चल रहे मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट के यथास्थिति के आदेश के बाद बड़ी संख्या में अधिकारी यूपी में ही रुक गए।
आ सकते हैं आईएएस भी
आईएएस अधिकारियों ने कैट में अपने मामले को उठाया है जिस पर फैसला लंबित है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो सकता है शेष दो आईएएस अधिकारियों को भी उत्तराखंड आना पड़ सकता है।
2000 में जिन अधिकारियों को उत्तराखंड भेजा गया था उनमें से कुछ की पदोन्नति यूपी सरकार ने आईएएस के लिए कर दी है। वहीं इस दौरान कुछ सेवानिवृत्त हो गए।
हाईकोर्ट ने भी खारिज की थी याचिका
कानूनी लड़ाई लड़ने वालों में अगुवाकार याचिकाकर्ता रहे उत्तराखंड के आबकारी आयुक्त एवं सचिव विनय शंकर पांडेय 2011 में अपनी विशेष याचिका वापस लेकर उत्तराखंड में ज्वाइनिंग दे दी। अब शेष 19 अधिकारियों के संबंध में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। जिन्हें उत्तराखंड में ज्वाइनिंग देनी होगी।
उल्लेखनीय है कि 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इन अधिकारियों की याचिका खारिज कर दी थी। जिसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट गए थे जहां से उन्हें यथास्थिति बनाए रखने का आदेश मिला और अधिकारी तब से वहीं तैनात थे।