नियमों का उल्लंघन करके यहां टिके यूपी के दो आईएएस अफसरों में से एक दमयंती दोहरे को पेंशन यूपी से मिलेगी। दमयंती की सेवानिवृत्ति अगले माह होनी है। दमयंती के अलावा गृह सचिव विनोद शर्मा भी केंद्र की मंजूरी के बगैर यहां जमे हैं। सर्विस रूल को धता बताकर यहां टिके इन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए इन्हें न केवल महत्वपूर्ण महकमों में तैनाती दी है, बल्कि इन पर वेतन और अन्य सुविधाओं जैसी नियामतें बरसाई जा रही हैं।
पीसीएस से आईएएस कैडर में प्रोन्नत विनोद शर्मा को राज्य गठन के समय कार्मिक आवंटन बंटवारा नियमावली के तहत यूपी राज्य मिला, लेकिन वह नहीं गए। उच्च न्यायालय नैनीताल के आदेश के बाद शर्मा को जुलाई 2010 में यूपी के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया। इसके बाद फिर वह अक्तूबर 2010 में वापस आ गए। यूपी में ही वह 2012 में आईएएस कैडर में प्रमोट हो गए, फिर भी यहीं डटे रहे।
नियमानुसार होना यह चाहिए था कि आईएएस बनने के बाद फिर से दोनों राज्यों की एनओसी और डीओपीटी से उत्तराखंड प्रतिनियुक्ति की मंजूरी ली जाती लेकिन, ऐसा कुछ नहीं हुआ।
केंद्र की अनुमति के बिना ही जमी रहीं
दमयंती दोहरे वर्ष 1998 से देहरादून में ही तैनात हैं। उन्हें भी कार्मिक बंटवारा आवंटन नियमावली के तहत यूपी आवंटित हुआ, लेकिन वह नहीं गई। इसी बीच दोहरे 2013 में पीसीएस से आईएएस कैडर में प्रमोट हो गईं, लेकिन राज्य सरकार ने दोहरे को भी यूपी के लिए रिलीव नहीं किया और न ही इंटरस्टेट डेप्युटेशन के लिए केंद्र से अनुमति ली गई। शर्मा और दोहरे दोनों के ही मामले में राज्य सरकार सोती रही।
दमयंती दोहरे की सेवानिवृत्ति करीब आई तो उनकी पेंशन की चिंता सताने लगी। इस पर कार्मिक विभाग ने यूपी से पत्राचार किया, जिस पर यूपी की ओर से पेंशन दिए जाने पर सहमति जता दी है। कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अतर सिंह ने दमयंती दोहरे को यूपी की ओर से पेंशन दिए जाने पर सहमति दिए जाने की पुष्टि की।
यह है अंतर्राज्यीय प्रतिनियुक्ति की शर्तें
आल इंडिया सर्विस रूल के तहत दोनों राज्यों की एनओसी के बाद प्रस्ताव केंद्र में डीओपीटी को भेजकर मंजूरी लेनी होती है। यदि किसी राज्य का आईएएस दूसरे राज्य में प्रतिनियुक्ति पर जाता है तो प्रतिनियुक्ति पर लेने वाले राज्य को लीव सैलरी कॉन्ट्रीब्यूशन के रूप में कुछ धनराशि देनी होती है।