तराई में भूजल स्तर गिरने व कीटों की समस्या महंगी होती खेती को देखते हुए सरकार को प्रस्ताव भेजकर बेमौसम धान की खेती पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसका शासनादेश जारी होते ही जिले में बेमौसम धान प्रतिबंधित हो जाएगा।
- डॉ. पीके सिंह, आयुक्त कुमाऊं, कृषि विभाग
दो दशक पूर्व तराई में पानी के कई स्रोत थे, लेकिन बेमौसमी धान की खेती के बाद अब सबमर्सिबल पंप से 150 से 200 मीटर पर पानी निकल रहा है। यदि तराई में बेमौसमी की धान की खेती पर प्रतिबंध नहीं लगा तो आने वाले समय में तराई में खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। आने वाली किसानों की नई पीढ़ियां खेती के पानी को तरस जाएंगी। गिरते भूजल स्तर की समस्या के कारण ही पंजाब, हरियाणा व यूपी में बेमौसमी धान की खेती प्रतिबंधित है।
- तजिंदर सिंह विर्क, प्रदेश अध्यक्ष, तराई किसान संगठन
तना छेदक, ब्लाइट व बीपीएच कीट हुए सक्रिय
कृषि विभाग के मुताबिक, धान की फसल में तना छेदक, ब्लाइट, बीपीएच, पत्ती लपेटक आदि कीट सक्रिय रहते हैं। धान का बीज इन कीटों का होस्ट होता है। फसल कटने के बाद कुछ दिनों तक यह कीट सक्रिय रहते हैं। धान की एक फसल कटने के कुछ दिनों बाद बेमौसमी धान की खेती होने से इन कीटों का पनपने का मौका मिलता है। कीटों की सक्रियता बढ़ने से धान की गुणवत्ता खराब होने व कीटनाशकों को नष्ट करने के लिए तराई में अत्यधिक कीटनाशकों का प्रयोग करना पड़ रहा है।