ब्रह्मकपाल के तीर्थ पुरोहितों ने चारधाम यात्रा शुरू करने का विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार यात्रा शुरू करती है तो वह आंदोलन शुरू कर देंगे। उन्होंने इस संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर देवस्थानम् के इस निर्णय को तुरंत वापस लेने की मांग की।
सरकार ने देवस्थानम् बोर्ड के निर्णय के अनुसार एक जुलाई से कुछ शर्तों के साथ प्रदेश के लोगों के लिए चारधाम यात्रा शुरू करने की अनुमति दी है। ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित महापंचायत के अध्यक्ष उमानंद सती का कहना है कि जब देवस्थानम् बोर्ड का प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है तो ऐसे में बोर्ड निर्णय कैसे ले सकता है।
कहा कि अभी तक चारों धाम कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं। यदि बाहर से यात्री आते हैं तो धामों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। इस दौरान मदन कोठियाल, अमित सती, दीनदयाल कोठियाल, संजय हटवाल, जेपी हटवाल, संजय सती, मुकेश नोटियाल, दीपक सती, विवेक सती, सतीश सती और विश्मवर दत्त नौटियाल मौजूद थे।
तीर्थ पुरोहितों ने प्रदेश सरकार द्वारा राज्य स्तर पर चारधाम यात्रा संचालन शुरू करने का विरोध किया। कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार का यात्रा संचालन का निर्णय उचित नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की भी मांग की है।
केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला, महामंत्री कुबेरनाथ पोस्ती, लक्ष्मी नारायण जुगराण, विजेंद्र शर्मा, अरविंद शुक्ला, व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष महेश बगवाड़ी आदि का कहना है कि सोनप्रयाग से केदारनाथ तक कोई भी यात्री व्यवस्था नहीं है।
धाम में यात्रियों के लिए एक रात भी ठहरने के इंतजाम नहीं किए गए हैं। वहीं, जिस रफ्तार से प्रदेश में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है, ऐसे में यदि कोई संक्रमित यात्री धाम में पहुंचा तो यहां भी महामारी की स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने परिस्थितियां सामान्य होने पर सितंबर-अक्तूबर से यात्रा शुरू करने की मांग की है। दूसरी ओर उत्तराखंड देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी का केदारनाथ में धरना जारी है।