विश्व के कई देशों से नाखुश संयुक्त राष्ट्र ने अपने जरूरी 'मिशन' की बागडोर भारत के हाथ में सौंप दी है।
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण जैव विविधता पर मंडरा रहे खतरों के मद्देनजर विश्व के कई देशों में संतोषजनक कार्य न होने से नाखुश संयुक्त राष्ट्र ने यह मिशन भारत को दिया है।
संयुक्त राष्ट्र ने जैव विविधता के संरक्षण को लेकर एक नए ग्रुप का गठन किया है जिसमें 10 देश शामिल हैं। इस ग्रुप का अध्यक्ष भारतीय वन्य जीव संस्थान के निदेशक डॉ. वीबी माथुर को बनाया गया है।
यूनेस्को भी विश्व प्राकृतिक धरोहरों को सहेजने के मामले में भारत को अपना ‘गुरु’ मान चुका है। अब संयुक्त राष्ट्र ने जैव विविधता संरक्षण के संबंध में तैयार की गई सात संधियों को प्रभावी रूप से विश्व के विभिन्न देशों में लागू करने के लिए भारत को जिम्मेदारी सौंपी है।
जैव विविधता संरक्षण पर कार्य कैसे किए जाने हैं इस पर जेनेवा की बैठक में फार्मेट तैयार कर लिया गया है। इस फार्मेट पर देश अपने यहां की जैव विविधता संरक्षण पर होने वाले कार्यों की प्रगति रिपोर्ट भेजेंगे। ग्रुप की पहली बैठक जिनेवा में 17-18 सितंबर को हो चुकी है। अगली बैठक जनवरी 2016 में प्रस्तावित है।
दून डॉ. वीबी माथुर के नेतृत्व में भारत करेगा अगुआई
डॉ. माथुर ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने 192 सदस्य देशों के लिए जैव विविधता संरक्षण को लेकर सात संधियां तैयार की थीं। भारत इन सभी संधियों का सदस्य है।
कुछ देश जरूरत के लिहाज से पांच और संधियों केसदस्य बने थे। विभिन्न देशों के बीच इन संधियों पर अमल करने के लिए तालमेल नहीं बैठ पा रहा है इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने जैव विविधता ग्रुप बनाया है।
संयुक्त राष्ट्र की सात संधियां
- जीव वैज्ञानिक विविधता का संरक्षण
- खतरे में पड़ीं वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अंकुश
- एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले (माइग्रेटरी) वन्य जीवों का संरक्षण
- भोजन और कृषि में प्रयोग होने वाले प्लांट जेनेटिक स्रोतों का संरक्षण
- नमी वाले क्षेत्रों (वेट लैंड) और इनकेस्रोतों का संरक्षण
- सांस्कृतिक और प्राकृतिक विश्व धरोहरों का संरक्षण
- विश्व पौधा स्रोतों का संरक्षण
ग्रुप के सदस्य देश
- भारत, कनाडा, सूडान, पलाओ, बोस्निया-हर्जेगोविना, जार्जिया, मैक्सिको, फिनलैंड, पेरू आदि