इसी वजह से उन्होंने गंगा के लिए योजना बनाए जाने के दौरान शुद्धीकरण शब्द हटवाकर संरक्षण लिखा था। उन्होंने कहा कि गोमुख से गंगासागर तक 1600 गांवों को खुले में शौच मुक्त बना दिया गया है। गंगा के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने के लिए नदी में पहले के समान जलीय जीव-जंतुओं की संख्या सुनिश्चित की जानी चाहिए। दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संस्थापक अध्यक्ष आशीष गौतम ने कहा कि गंगा आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है। गंगा रहेगी तो हमारा देश और संस्कृति बचेगी।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक युद्धवीर ने कहा कि गंगा हमारी सभ्यता और संस्कृति की साक्षी है। हम सबका दायित्व गंगा को प्रदूषित नहीं होने देना है। गंगा स्वच्छता मिशन के निदेशक अक्षय राउत ने कहा कि गंगा किनारे स्थित सभी गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाना हमारा लक्ष्य है। उन्होंने गंगा किनारे स्थित गांवों के लोगों से जैविक खेती करने की अपील की। कार्यक्रम का संचालन दिव्य प्रेम सेवा मिशन के संयोजक संजय चतुर्वेदी ने किया।
मौके पर सरस्वती विद्या मंदिर मायापुर के प्रधानाचार्य एवं प्रदेश निरीक्षक डॉ. विजय पाल सिंह, अविनाश औहरी, विकास गोयल, मयंक शर्मा, सरोज जैन, अजीत जैन, मौसमी गोयल, नवीन पंत आदि ने अपने विचार रखे। उमा भारती ने गंगा स्वच्छता के लिए कार्य कर रहीं विभिन्न संस्थाओं के कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया।