परियोजना जटिल व बड़ी, समय पर पूरी होगी
टनल निर्माण की सुरक्षा और चुनौती के सवाल पर मंत्री वैष्णव ने कहा कि इतनी बड़ी और जटिल परियोजना को हिमालय के युवा पहाड़ों पर काफी कम समय में पूरा किया जाएगा, जहां कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हिमालय के पहाड़ों में अधिकतम मिट्टी पाई जाती है, जो सुरंग बनाने में मुश्किल पैदा करती है। इसलिए यहां सुरंग बनाने के लिए हिमालयन टनलिंग मेथ्ड यानी एचटीएम को इजाद किया गया है, जिससे हिमालय के युवा पहाड़ों के भीतर संतुलित टनल बनाई जाती है। इसमें टनल बोरिंग के साथ ही क्रंकीटयुक्त कर मजबूती दी जाती है।
तैयार हो रही बागेश्वर-टनकपुर और ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल लाइनों की डीपीआर
अमर उजाला ने रेल मंत्री वैष्णव से प्रदेश की चार महत्वपूर्ण भविष्य की रेल परियोजनाओं की प्रगति को लेकर सवाल पूछा तो मंत्री ने बताया कि बागेश्वर-टनकपुर, बागेश्वर-गैरसैंण, ऋषिकेश-उत्तरकाशी और देहरादून-सहारनपुर रेलवे लाइनों की डीपीआर बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए अत्याधुनिक लिडार तकनीकी से सर्वे किया जा रहा है। जैसे-जैसे काम शुरू होगा, उसकी प्रगति भी जनता से साझा की जाएगी। इस बजट से इन परियोजनाओं को भी एक गति मिलेगी।
11 स्टेशन बनेंगे अमृत स्टेशन
मंत्री वैष्णव ने बताया कि देहरादून, हरिद्वार जंक्शन, हर्रावाला, काशीपुर जंक्शन, काठगोदाम, किच्छा, कोटद्वार, लालकुआं जंक्शन, रामनगर, रुड़की और टनकपुर सहित 11 स्टेशनों को अमृत स्टेशनों के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य में 2014 से 2024 तक 69 किमी के नए रेल ट्रैक बिछे हैं। इसी अवधि में 303 किमी की रेल लाइनों का विद्युतीकरण किया गया है। 2009-14 के बीच यह आंकड़ा शून्य था। राज्य में 70 रेल ब्रिज और अंडर ब्रिज का निर्माण हो चुका है। फिलहाल 216 किमी की तीन रेल परियोजनाओं (रेलवे ट्रैक) का काम चल रहा है , जिसकी लागत 25,941 करोड़ रुपये है।