750 रेलवे स्टेशनों पर एक स्टेशन एक उत्पाद की सुविधा
देश में 750 रेलवे स्टेशनों पर एक स्टेशन-एक उत्पाद योजना लागू की गई है। इसमें हरिद्वार और देहरादून स्टेशन शामिल हैं। यहां गैर सरकारी संगठन और संस्थाएं स्थानीय उत्पाद के स्टॉल लगाती हैं।
उत्तराखंड में वंदे भारत, वंदे मेट्रो ट्रेनों के लिए अभी इंतजार
रेल मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल वंदे भारत और वंदे मेट्रो ट्रेन के लिए उत्तराखंड के लोगों को फिलहाल इंतजार करना होगा। मंडल रेल प्रबंधक अजय नंदन के मुताबिक, बजट में उत्तराखंड के लिए वंदे भारत और वंदे मेट्रो ट्रेन को लेकर कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन, जिस तरह सरकार ने देश में 400 वंदे भारत ट्रेनों के संचालन का प्रावधान किया है, उससे उम्मीद है कि एक ट्रेन उत्तराखंड के हिस्से भी आ सकती है।
कोटद्वार में कंप्यूटरीकृत सिग्नल प्रणाली से होगा ट्रेनों का संचालन
मंडल रेल प्रबंधक ने बताया कि अमृत भारत योजना के तहत कोटद्वार रेलवे स्टेशन से ट्रेनों का संचालन पुरानी सिग्नल प्रणाली की जगह कंप्यूटर के जरिये किया जाएगा। इसके लिए रेलवे की ओर से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
रुड़की-देवबंद रेल परियोजना को भी मिलेगी गति
मंडल रेल प्रबंधक अजय नंदन ने बताया कि अब बहुप्रतीक्षित रुड़की-देवबंद रेल परियोजना के निर्माण कार्यों को भी गति मिलेगी। रुड़की रेलवे स्टेशन पर दो नए प्लेटफार्म का निर्माण करने के साथ ही नए फुट ओवर ब्रिज, स्वचालित सीढ़ी का निर्माण किया जाएगा। रुड़की ऐतिहासिक स्टेशनों में शामिल है। यह देश का पहला स्टेशन है, जहां वर्ष 1852 में पहली बार मालगाड़ी का संचालन किया गया था।
105 करोड़ से बदलेगी हर्रावाला स्टेशन की तस्वीर
हर्रावाला रेलवे स्टेशन को 105 करोड़ की लागत से टर्मिनल रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां से 24 कोच वाली ट्रेनों का संचालन करने के लिए प्लेटफॉर्म का विस्तारीकरण कर नए प्लेटफार्म बनाए जाएंगे। देहरादून से चलने वाली कई ट्रेनों का संचालन भी हर्रावाला से ही किया जाएगा। देहरादून से चुनिंदा ट्रेनें ही चलेंगी। हर्रावाला से हरिद्वार के बीच के पड़ने वाले डोईवाला, रायवाला और कांसरो जैसे स्टेशनों के कायाकल्प पर भी 150 करोड़ खर्च होंगे।
सामरिक महत्व की तीन परियोजनाओं अधर में
इस बजट में भी बागेश्वर-टनकपुर, कर्णप्रयाग- बदरीनाथ, डोईवाला-गंगोत्री-यमुनोत्री जैसी रेल परियोजनाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। बता दें कि धार्मिक, सामरिक और पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण इन रेल परियोजनाओं के लिए रेलवे सर्वे कर चुका है। लेकिन, अभी तक बात इससे आगे नहीं बढ़ पाई है।