इसके बाद उपनल ने विदेश में मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव तैयार किया। इसके तहत उपनल संबंधित फर्मों से अनुबंध करेगा। उसके बाद फर्मों को कार्मिकों की संख्या और पद के अनुसार वेतन का भुगतान सीधे उनके खाते में करना होगा। शनिवार को राज्य मंत्रिमंडल ने उपनल के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
उपनल के जरिये विदेशों में नौकरी मिलने पर बेरोजगारों को फायदा होगा। नियोक्ता विदेश में उनसे किसी तरह की मनमानी नहीं कर सकेगा। उन्हें उतना ही वेतन और वही काम दिया जाएगा, जो पहले से तय होगा।
अभी कई एजेंसियां या नियोक्ता विदेश में अच्छी नौकरी देने के नाम पर दूसरा काम कराते हैं और पहले से तय वेतन भी नहीं देते। अन्य निजी नियोक्ताओं या एजेंसियों की तुलना में उपनल सबसे कम कमीशन लेगा। कई मामलों में बेरोजगार दलालों के चक्कर में फंसकर अपना पैसा लुटा देते हैं।
विदेश में भी उपनल केवल सैनिक, पूर्व सैनिक और उनके आश्रितों का ही प्रयोजन (स्पांसरशिप) कराएगा। कुछ समय पूर्व हुए विवाद के बाद उपनल ने किसी भी अन्य अभ्यर्थी को प्रयोजन न देने का फैसला किया है।
जबकि केंद्रीय संस्थानों में उपनल पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों से इतर भी नियुक्ति दे सकता है। उपनल के एमडी ले.ज. पीपीएस पाहवा (सेवानिवृत्त) ने बताया कि इस संबंध में स्पष्ट गाइडलाइन अगले कुछ दिनों में जारी की जाएगी।