लाठीचार्ज के दौरान पुलिस ने विकलांग प्रशिक्षु शिक्षकों को भी नहीं बख्शा। प्रशिक्षुओं का आरोप है कि पुलिस लाठीचार्ज का मन पहले से बनाए हुए थी। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने प्रशिक्षु शिक्षकों के सिरों को ही निशाना बनाया।
'पुलिस ने विकलांगों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा। लाठी लगने से मेरा सिर फट गया, आठ टांके लगे हैं। 108 नंबर डायल किया, लेकिन एंबुलेंस भी काफी देर बाद आई।'
मनोज बिष्ट, दून अस्पताल में भर्ती अल्मोड़ा निवासी
'सिर के पिछले हिस्से पर डंडा लगा। गर्दन का हिस्सा सूज गया है। इसके अलावा शरीर में अन्य जगह भी चोटें आई हैं, पुलिस ने हमारे सिर को निशाना बनाया।'
मनोज कंडवाल, दून अस्पताल में भर्ती, प्रतापनगर टिहरी निवासी
'विकलांग हूं, इसके बावजूद पुलिस ने नहीं बख्शा। लाठी लगने से सिर और पेट पर चोट आई है, पुलिस ने सभी प्रशिक्षुओं पर बेरहमी से लाठियां बरसाई।'
दीपक मेहता, दून अस्पताल में भर्ती, अल्मोड़ा निवासी
'सरकार ने नौकरी की जगह लाठियां दी, लाठी लगने से दाहिने कंधे और पीट पर चोट आई है। कई प्रशिक्षुओं को नीचे गिरने के बावजूद पीटा गया।'
विजय सिंह साहू, दून अस्पताल में भर्ती थलीसैंण पौड़ी निवासी