उत्तराखंड में ऊखीमठ में बादल फटने से आई तबाही को तीन साल हो गए पर आपदा पीड़ितों की जिंदगी आज भी वैसी ही बदहाल बनी हुई है। ऊखीमठ त्रासदी के आपदा पीड़ित आज भी टीन शेड में रहने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने इन्हें मकान निर्माण के लिए मात्र एक लाख रुपये की रकम दी थी, जिससे यह अपनी छत तैयार नहीं कर सके।
केंद्र सरकार ने मृतक आश्रितों के लिए दो लाख रुपये की सहायता घोषित थी, लेकिन कई प्रभावित परिवारों को तीन साल गुजर जाने पर भी यह धनराशि नहीं मिल पाई है।
13/14 सितंबर 2012 की मध्यरात्रि को ऊखीमठ में बादल फटने से चुन्नी मंगोली, ब्राह्मणखोली, प्रेमनगर, किमाणा, डुंगर सेमला और गिरिया गांव के 62 लोग काल के ग्रास बने थे। आपदा में 51 आवासीय मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे।
57 लाशें हुई थी बरामद, 5 लोग लापता
मृतकों में से 57 लोगों के शव बरामद हो गए थे जबकि पांच लापता लोगों को मजिस्ट्रीयल जांच के बाद मृत घोषित कर दिया गया था। मृतकों के आश्रितों को भी मुआवजा वितरण में दोहरे मापदंड अपनाए गए।
जिन 57 लोगों के शव बरामद हो गए थे, उनके आश्रितों को राज्य सरकार की ओर से तीन लाख और केंद्र सरकार द्वारा दो लाख रुपये की मुआवजा राशि दी गई। जबकि लापता लोगों को मात्र तीन लाख रुपये ही दिए गए।
केंद्र सरकार से दो लाख रुपये का मुआवजा तीन वर्ष बाद भी उन्हें नहीं मिल पाया है। आपदा में क्षतिग्रस्त भवनों के निर्माण के लिए सरकार द्वारा मात्र एक लाख रुपये का मुआवजा दिया गया।
पढ़िए, इनका है क्या कहना?
मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर शिक्षा मंत्री ने दो लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा भवन निर्माण के लिए देने की घोषणा की थी। इस संबंध में 4 अगस्त 2015 को आपदा पीड़ितों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की। उन्होंने शीघ्र अतिरिक्त मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक आपदा पीड़ितों को यह अतिरिक्त मुआवजा नहीं मिल पाया है।
-केशवानंद त्रिवेदी अध्यक्ष ऊखीमठ आपदा संघर्ष समिति।
तीन साल बाद भी मृतक आश्रितों को केंद्र सरकार द्वारा घोषित दो लाख रुपये की मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है।
-आपदा प्रभावित दिनेश जमलोकी, धर्मेंद्र पुष्पवाण, विक्रम रावत, सुखवीर सिंह पुष्पवाण।
ऊखीमठ आपदा में मृतक आश्रितों को केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली दो लाख रुपये की धनराशि तहसील को प्राप्त हो गई है। शीघ्र ही इसका वितरण आश्रितों को किया जाएगा।
-यूएस चौहान, उप जिलाधिकारी ऊखीमठ।