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त्रिवेन्द्र के अजब-गजब नारों का दुबई कनेक्शन

Sat, 21 Sep 2013 12:15 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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मानसून सत्र के आखिरी दिन उत्तराखंड क्रांति दल (पी) ने विधानसभा पर जोर दिखाया। केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार के नेतृत्व में जुलूस में शामिल कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रिस्पना पुल पर रोक लिया।
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बैरियर पार करने के लिए कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और जमकर धक्कामुक्की हुई। पुलिस ने पंवार समेत कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। बाद में उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया।

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पुलिस ने दिखाई सख्ती
यूकेडी पी का जुलूस शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे रिस्पना पुल बैरियर पर पहुंचा। धक्कामुक्की के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कार्यकर्ताओं को पुलिस बसों में भरना शुरू कर दिया।
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इस पर अध्यक्ष पंवार और कुछ अन्य कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। यहां सभा में पंवार ने कहा कि मंत्री के घर में फायरिंग के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

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गैरसैंण हो स्थाई राजधानी
इससे साफ पता चलता है कि सरकार अपराधियों को संरक्षण दे रही है। उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग भी उठाई।

बाद में पुलिस ने पंवार समेत सभी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन में छोड़ दिया। वहीं बर्खास्त पुलिस कर्मियों को बस में बैठाने के लिए पुलिस को खासी मेहनत करनी पड़ी।

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पंवार ही जानें अपने नारों का राज
प्रदर्शन के दौरान बैरियर के पास यूकेडी (पी) केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने अपने अजब नारों से सबका ध्यान खींचा। जोश में पंवार ने पहला नारा लगाया, ‘दुबई से संचालित सरकार को बर्खास्त करो’ इसके बाद बोले, ‘दाऊद के दोस्तों को राज्य से भगाओ’।

कार्यकर्ताओं ने उनका साथ जरूर दिया, लेकिन वे इनका मतलब नहीं समझ सके। कुछ ने पंवार से वजह पूछी भी, लेकिन पंवार ने राज नहीं खोला। उनकी इस नारेबाजी पर पुलिस अधिकारी भी हैरान नजर आए।

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महिलाएं फिर बनी मुसीबत
प्रमिला रावत समेत कुछ महिला यूकेडी कार्यकर्ताओं ने पुलिस को खूब छकाया। महिला कांस्टेबलों को उन्हें काबू में करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। परेशान कांस्टेबल बैकफुट पर आती दिखीं तो एसपी देहात ममता वोहरा आगे आ गई। इसके बाद कांस्टेबलों ने महिलाओं को हटाया।

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बर्खास्त पुलिसकर्मी भी रहे साथ
दो जिलों से आवेदन के चलते बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मी भी यूकेडी के प्रदर्शन में शामिल रहे। उनका जुलूस अलग रहा, लेकिन रिस्पना बैरियर पर वे यूकेडी के जुलूस के साथ आ गए।

यूकेडी कार्यकर्ताओं ने भी उन्हें नियुक्ति देने की मांग उठाई। पुलिस को इन बर्खास्त जवानों को काबू करने में भी खासी मशक्कत करनी पड़ी। उन्हें भी पुलिस लाइन ले जाकर छोड़ा गया।
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