जहां बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए चिकित्सक ने उसे हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। जिस पर परिजन उसे लेकर हरबर्टपुर स्थित लेहमन अस्पताल पहुंचे जहां उपचार के दौरा बच्चे ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद से परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। बच्चे के दादा और पिता सदमे में है। बच्चा अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। उसकी एक बड़ी बहन है।
पजिटिलानी में खुलता अस्पताल तो बच जाती जान जिस गांव में यह घटना हुई उससे करीब पांच किमी दूर पजिटिलानी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत है। जिसका वर्ष 2005 में भवन भी बनकर तैयार हो चुका है।
लेकिन अस्पताल में अब तक डॉक्टरों की तैनाती नहीं हो सकी है। जिसके चलते भवन शोपीस बना हुआ है। अस्पताल चंदऊ, खोई, सुपऊ, खमरोली, सलगा, टिमरा, आरा समेत 50 से अधिक गांव का केंद्र बिंदु है। परिजनों का कहना है कि यदि अस्पताल में डॉक्टर होते तो शायद उनके बच्चे की जान बच सकती थी।