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धड़कने बढ़ाती हैं उत्तराखंड की यह दो सीट

Sun, 09 Mar 2014 09:02 AM IST
अनूप वाजपेयी, अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
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विशुद्घ रूप से पहाड़ की दो लोकसभा सीट पौड़ी गढ़वाल और अल्मोड़ा(सुरक्षित) राजनैतिक दलों की धड़कने बढ़ाने और जीत के लिए दम फुला देनी वाली हैं।
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यहां बड़े-बड़े दिग्गजों के पसीने छूटे हैं और जीत-हार का अंतर बहुत नहीं होता है। दोनों सीटों की भौगोलिक परिस्थिति के चलते उम्मीदवारों को मतदाताओं को रिझाने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।

पौड़ी गढ़वाल सीट पर एक नजर

पुरुष मतदाता- 612476, महिला मतदाता- 592082, कुल- 1204558

पौड़ी केमतदाताओं ने 2009 के चुनाव में लगातार जीतती आ रही बीजेपी को हरा कांग्रेस के सतपाल महाराज को संसद भेजा।
 
उनके पहले बीजेपी से टीपीएस रावत 2008 उपचुनाव में और भुवन चंद्र खंडूरी यहां से 1998, 1999 और 2004 में सांसद चुनकर गए। सतपाल ने यहां से 1996 का चुनाव तिवारी कांग्रेस से जीता था। जबकि 1991 खंडूरी पहली बार यहां से जीते थे।

1977 में जनता पार्टी के जगन्नाथ शर्मा औश्र 1989 में जनता दल से चंद्र मोहन सिंह नेगी चुनाव जीते हैं। नेगी 1984 में कांग्रेस के टिकट पर भी चुनाव जीते थे।

पौड़ी लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व 1980 में हेमवती नंदन बहुगुणा ने भी किया है। जबकि 1951 से 167 तक चार चुनावों में भक्त दर्शन यहां के सांसद रहे।

1971 में प्रताप सिंह नेगी भी कांग्रेस के सांसद रहे। इस सीट पर सैनिकों और पूर्व सैनिकों का भी दबदबा रहा है। परंपरागत ढंग से कांग्रेस-भाजपा के उम्मीदवार मामूली अंतर से हारते-जीतते रहे हैं।

इस सीट पर ब्राह्मण-ठाकुर का जातीय समीकरण भी देखने को मिला है। इसी सीट में कुमाऊं की रामनगर विधानसभा भी आती है।

अल्मोड़ा (सुरक्षित) सीट पर एक नजर

पुरुष मतदाता- 611422, महिला मतदाता- 594241, कुल- 1205663

अल्मोड़ा सीट की पहचान बारी-बारी से कांग्रेस- बीजेपी के रूप में रही है। शुरूआती दौर में यह सीट कांग्रेस की रही फिर लगातार बीजेपी ने कब्जा रखा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने 1958 से लगातार जीतती आ रही कांग्रेस पर पहली बार ब्रेक लगा 1977 में जनता पार्टी से चुनाव जीता था। अल्मोड़ा सीट 2009 में आरक्षित होने के बाद अब कांग्रेस सांसद प्रदीप टम्टा के पास है।

अल्मोड़ा सीट को भी हरीश रावत से जोड़कर देखा जाता है। रावत ने यहां से लगातार 1980, 1984, 1989  का लोकसभा चुनाव जीतकर अपना राजनीतिक ग्राफ बढ़ाया तो इसी अल्मोड़ा ने उन्हें 1996, 1998, 1999 (पत्नी रेणुका 2004 में) लगातार हराया भी।

बीजेपी के बच्ची सिंह रावत लगातार चार बार सांसद चुनकर गए। बीजेपी से 1991 में जीवन शर्मा भी सांसद रहे हैं। अभी भी अल्मोड़ा सीट का तानाबाना कांग्रेस हरीश रावत के ईद-गिर्द ही बुनती है।

उक्रांद ने कसी कमर

लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने के लिए उक्रांद और अन्य क्षेत्रीय दलों के अलावा आम आदमी पार्टी भी तैयारी कर चुकी है।

उक्रांद के दोनों धड़े (काशी सिंह ऐरी और त्रिवेंद्र पंवार गुट) अपने-अपने प्रत्याशी अगले सप्ताह तक घोषित कर देंगे। आम आदमी पार्टी ने भी लोकसभा सीटों पर अपनी ओर से सर्वे करवाया है।

अपनी पार्टी उत्तराखंड रक्षा मोर्चा का आप में विलय कर चुके पूर्व सांसद टीपीएस रावत आप चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
राज्य में लोकसभा चुनावों के दौरान क्षेत्रीय दलों का मत फीसदी निरतंर घिर रहा है।

वहीं इस बार आप के मैदान में होने से क्षेत्रीय दलों को भाजपा कांग्रेस के अलावा आप भी चुनौती देगा। उत्तराखंड क्रांति दल (ऐरी) का समर्थन राज्य की कांग्रेस सरकार को है, लेकिन चुनाव में दल पांचों सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहा है।

11 और 12 मार्च को दल की नैनीताल में संसदीय बोर्ड की बैठक में प्रत्याशियों केनामों पर मुहर लगेगी। दल के केंद्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी के खुद मैदान में उतरने की बात भी चल रही है।

दल के कार्यकारी अध्यक्ष हरीश पाठक ने बताया कि उनके पांचों प्रत्याशियों की घोषणा जल्द होगी।
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आप पर टिकी हैं नजरें

आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए उत्तराखंड में प्रत्याशी उतारने से पहले एक सर्वे करवाया है।

पार्टी पांचों सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी या नहीं यह स्पष्ट नहीं है। सर्वे को पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय भेजा गया है, जहां संभावित प्रत्याशियों को जल्द बुलाया जाएगा।

क्षेत्रीय दल रक्षा मोर्चा का आप में विलय कर चुके पूर्व सांसद लेफ्टिनेंट जनरल (रि) टीपीएस रावत को पौड़ी से टिकट मिल सकता है। जनरल रावत का कहना है कि कहां से चुनाव लड़ना है यह पार्टी तय करेगी।
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