फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला में दो बाघों की बीच हुई लड़ाई, पर्यटकों ने वीडियो बनाकर किया वायरल

Wed, 20 Jan 2021 09:49 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रामनगर (नैनीताल)
विज्ञापन
कॉबेर्ट पार्क में बाघों की लड़ाईं - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढिकाला रेंज में दो बाघों की बीच लड़ाई हो गई। बाघों की लड़ाई होते देख पर्यटक रोमांचित हो गए। मौके पर मौजूद पर्यटकों ने बाघों की लड़ाई का वीडियो बना लिया और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया।

विज्ञापन

मंगलवार को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढिकाला जोन में चौड़ के पास दो बाघ घूम रहे थे। इसी बीच दोनों के बीच झड़प हो गई। वनाधिकारियों के अनुसार बाघों के बीच लड़ाई आम है।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 252 बाघ हैं और यहां आए दिन क्षेत्राधिकार को लेकर बाघ भिड़ जाते हैं। कई बार पर्यटकों को इस तरह की लड़ाई देखने को मिली है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

वन्यजीवों को बेहोश करने के गुर सिखा रहे डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञ 

उत्तराखंड समेत देश के सभी राज्यों में वन विभाग में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारी भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के निगरानी में वन्यजीवों को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने की गुर सीख रहे हैं। पशु चिकित्सा अधिकारियों का प्रशिक्षण सरिस्का टाइगर रिजर्व के साथ ही भरतपुर पक्षी विहार में दिया जा रहा है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के निदेशक डॉ. धनंजय मोहन ने बताया कि देश के सभी टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों में वन्यजीवों के आपसी संघर्ष की काफी घटनाएं सामने आती हैं। इसमें काफी संख्या में वन्यजीव घायल हो जाते हैं और इलाज के अभाव में दुर्बल हो जाते हैं। इसके लिए वन विभाग में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान हाथी, बाघ, तेंदुआ आदि हिंसक व घायल वन्यजीवों को ट्रेंकुलाइज करने और उनके प्राकृतिक निवास में छोड़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

डब्ल्यूआईआई के निदेशक डॉ. धनंजय मोहन ने बताया कि पांच चरणों में अलग-अलग राज्यों के पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें उत्तराखंड वन विभाग के सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। जिन राज्यों के पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। उनके क्षेत्रों से वन्यजीवों के इलाज को लेकर सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें