उत्तराखंड समेत देश के सभी राज्यों में वन विभाग में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारी भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के निगरानी में वन्यजीवों को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने की गुर सीख रहे हैं। पशु चिकित्सा अधिकारियों का प्रशिक्षण सरिस्का टाइगर रिजर्व के साथ ही भरतपुर पक्षी विहार में दिया जा रहा है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के निदेशक डॉ. धनंजय मोहन ने बताया कि देश के सभी टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों में वन्यजीवों के आपसी संघर्ष की काफी घटनाएं सामने आती हैं। इसमें काफी संख्या में वन्यजीव घायल हो जाते हैं और इलाज के अभाव में दुर्बल हो जाते हैं। इसके लिए वन विभाग में तैनात पशु चिकित्सा अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान हाथी, बाघ, तेंदुआ आदि हिंसक व घायल वन्यजीवों को ट्रेंकुलाइज करने और उनके प्राकृतिक निवास में छोड़ने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
डब्ल्यूआईआई के निदेशक डॉ. धनंजय मोहन ने बताया कि पांच चरणों में अलग-अलग राज्यों के पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें उत्तराखंड वन विभाग के सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दे दिया गया है। जिन राज्यों के पशु चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। उनके क्षेत्रों से वन्यजीवों के इलाज को लेकर सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।