विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट फतेह करने वाले सेना के दल में उत्तराखंड के दो सपूत शामिल थे। सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल रणवीर जम्वाल के नेतृत्व में 30 मार्च को एवरेस्ट मैसिफ एक्सपिडिशन 2016 दिल्ली से रवाना किया था। 30 सदस्यीय दल में पांच गढ़वाल रायफल के दून के लांस नायक प्रताप सिंह और रुड़की के नायक अंकुर रावत भी शामिल थे।
कर्नल जम्वाल के नेतृत्व में 19 मई को सुबह छह बजकर सात मिनट पर एवरेस्ट पहुंचने वाली पहली टीम में नायक अंकुर शामिल थे, जबकि अगले दिन एवरेस्ट की चोटी फतह करने वाले दूसरे दल में देहरादून नाथुवाला स्थित कृष्ण विहार के लांस नायक प्रताप सिंह शामिल थे।
पिछले साल नेपाल में 7.9 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आने के बाद लेफ्टिनेंट कर्नल रणवीर जम्वाल की नेतृत्व में एवरेस्ट फतह करने वाली यह पहली टीम है। पिछले साल 25 अप्रैल 2015 को आए भूकंप के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल रणबीर जम्वाल एवरेस्ट के बेस कैंप में मौजूद थे। उनके साथ सेना के कुछ और अधिकारी थे।
बेस कैंप में उस समय 22 अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही भी मौजूद थे, जब हिमस्खलन हुआ तो सब मारे गए थे। सेना की टीम ही सुरक्षित रही। भूकंप के बाद से एवरेस्ट पर पर्वतारोहण अभियान बंद था। पर्वतारोहियों संग एवरेस्ट पर जाने वाले शेरपाओं की माने तो भूकंप के बाद से एवरेस्ट पर जाने वाले पर्वतारोहियों में कमी आई है।