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कुमाऊंनी भाषा का साहित्य अकादमी में बजा डंका

Fri, 26 Jun 2015 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली, देहरादून
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साहित्य अकादमी ने बुधवार को अपने तीन वर्ग भाषा सम्मान, युवा पुरस्कार और बाल साहित्य पुरस्कार 2015 की घोषणा की। तीनों ही वर्गों में अलग-अलग भाषाओं में सम्मान दिया गया।
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कुमाऊंनी भाषा को नहीं है मान्यता
खास बात यह रही कि भाषा सम्मान वर्ग में उत्तराखंड में बोली जाने वाली कुमांऊनी भाषा में काम करने वाले दो लेखकों को सम्मान दिया गया। जबकि कुमांऊनी भाषा साहित्य अकादमी की मान्यता नहीं है। इसके अलावा बाल साहित्य के लिए अलग-अलग भाषा के विजेताओं के नाम की घोषणा की गई।

तीन लोगों को मिला भाषा सम्मान
क्लासिकल मिडिवल लिट्रेचर (साउथ) में काम करने के लिए मीनाक्षी सुंदरम को पुरस्कृत किया गया। दूसरा पुरस्कार क्लासिकल मिडिवल लिट्रेचर (ईस्ट) पर काम करने के लिए आचार्य मुनिश्वर को मिला।
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एक-एक लाख पुरस्कार
उत्तराखंड की कुमांऊनी भाषा में काम करने के लिए दो लोगों चारू चंद्र पांडे और मथुरादत्त मथपाल को भाषा सम्मान दिया गया। दोनों ही बुजुर्ग लेखक हैं और उन्होंने उत्तराखंड की भाषाओं में कई किताबें व कविताएं लिखी हैं। सभी पुरस्कार विजेताओं को साहित्य अकादमी की ओर से एक-एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

11 लेखकों को बाल साहित्य पुरस्कार
इस वर्ष बाल साहित्य पुरस्कार के लिए चार कहानी संग्रह, तीन कविता संग्रह, पांच उपन्यास, एक एकांकी और 11 लेखकों को बाल साहित्य में दिए गए उनके समग्र योगदान हेतु चुना गया है। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी की अध्यक्षता में 24 भाषाओं को बाल साहित्य में चुना गया।

कथाकारों में कश्मीर के नईम कश्मीरी, संस्कृत के जनार्दन हेगड़े, कृष्ण कुमार आशु को राजस्थानी और थॉकचम थोगंबा मैतेई को मणिपुरी भाषा के लिए चुना गया। कविता संग्रह के लिए ताराचंद कलांदरी, श्रीकांत सोरेन, चेल्ला गणपति को और नाट्य पुस्तक के लिए बानो सरताज को चुना गया। इसके अलावा 11 लेखकों में हिंदी के लिए शेरजंग गर्ग को बाल साहित्य पुरस्कार मिला।

23 भाषाओं में युवा पुरस्कारों की घोषणा
साहित्य अकादमी ने 23 भाषाओं में युवा लेखकों के नाम युवा पुरस्कार सम्मान के लिए घोषित किए हैं। इसमें कहानी, उपन्यास समेत अन्य लेखन शामिल है। सभी लेखक की उम्र 35 साल से कम है। हिंदी भाषा में महिला लेखक इंदिरा दांगी को उनके उपन्यास के लिए मिला है। अंग्रेजी में हांसदा शौभेंद्र शेखर को कहानी संग्रह के लिए यह सम्मान मिला है। सभी लेखकों को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
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