-दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित मेले में लाई गई दो पुस्तकें
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। पूर्व केंद्रीय मंत्री व उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक की दो पुस्तकों का दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में विमोचन किया गया।
युवाओं और शिक्षा नीति पर आधारित आत्मनिर्भरता से नवभारत निर्माण और बदलते वैश्विक परिवेश में मूल्य आधारित शिक्षा पुस्तकें नई दिशा देंगे।
डॉ. निशंक ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और नीतिगत संदर्भों में गहराई से विश्लेषित किया है। पुस्तक में संकलित आलेख बताते हैं कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक स्वावलंबन तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक चेतना, वैज्ञानिक दृष्टि, स्वदेशी नवाचार और राष्ट्रीय आत्मसम्मान से जुड़ा व्यापक विचार है।
दूसरी पुस्तक वैश्विक बदलते परिदृश्य में मूल्य आधारित शिक्षा वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और नई शिक्षा नीति पर केंद्रित दूरदर्शी विमर्श प्रस्तुत करती है। उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों का विकास और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना होना चाहिए। पुस्तक में यह तथ्य उभरकर आता है कि तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों में यदि शिक्षा मूल्यविहीन होगी तो समाज दिशाहीन हो जाएगा। डॉ. निशंक ने भारतीय संस्कृति, गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा के संतुलन पर विशेष बल देते हुए नई शिक्षा नीति को भारत के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत किया है।
दोनों पुस्तकों का विमोचन शिक्षाविद् और हंसराज कॉलेज की प्राचार्य प्रोफेसर रमा, वरिष्ठ साहित्यकार वंदना यादव, स्तंभ लेखक डॉ. वेद प्रकाश, कथाकार डॉ. अंजू रानी और डॉ. बेचैन कंडियाल ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर डॉ. विजय मिश्रा, डॉ. विजय यादव, शोधार्थी रंजना, प्रीति उपाध्याय एवं हंस प्रकाशन के स्वामी हरेंद्र तिवारी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे।