फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun News: आंखों के तीन हिस्सों में पनप रहा क्षय रोग, दृष्टि जाने का खतरा

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
आंखों का क्षय रोग (टीबी) मरीजों की आंखों की रोशनी के लिए खतरा बन रहा है। आंखों बाहरी, मध्य और अंदरूनी हिस्से में टीबी की गांठ बन रही है। दून अस्पताल में हर महीने इस तरह के 10 से 12 मरीज सामने आ रहे हैं। इसको लेकर चिकित्सकों ने चिंता जाहिर की है।



आमतौर पर छाती में क्षय रोग होने की घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन यह रोग आंखों में भी हो रहा है। यह मरीजों में पूर्ण अंधेपन की भी वजह बन सकता है। चिकित्सक के मुताबिक जिन मरीजों को छाती की टीबी होती है, उन्हें आंखों की टीबी का अधिक खतरा होता है। रक्त के माध्यम से टीबी संक्रमण छाती से आंखों तक पहुंच जाता है। दून अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. सुशील ओझा बताते हैं कि आंखों में टीबी के कुल चार प्रकार होते हैं। इसमें इंटीरियर यूवाइटिस, इंटरमीडिएट यूवाइटिस, कोरोडाइटिस और फिलेक्टेन्युलर कंजंक्टिवाइटिस आदि शामिल हैं।
विज्ञापन


सभी प्रकार के टीबी संक्रमण के लक्षण अलग-अलग होते हैं। आंखों की टीबी से पीड़ित मरीज के नेत्र के अंदर कोरोडाइटिस नोड्यूल नाम की गांठ बन जाती है।





इंटरमीडिएट यूवाइटिस और कोरोडाइटिस अधिक खतरनाक



इंटरमीडिएट यूवाइटिस और कोरोडाइटिस नामक आंखों की टीबी संक्रमण से पीड़ित को न तो दर्द होता है और न आंखों में सूजन जैसी कोई शिकायत आती है। ऐसे में मरीजों को इस रोग के बारे में शुरुआत में पता नहीं चल पाता। जब मरीजों को इसका पता चलता है, तब तक संक्रमण अपने अंतिम स्टेज पर पहुंच जाता है। इसका उपचार करना चिकित्सकों के लिए चुनौती साबित हो रहा है।
विज्ञापन






मोतियाबिंद के मरीजों में इस रोग की पहचान करना चुनौती

डॉ. सुशील ओझा के मुताबिक मोतियाबिंद के मरीजों में टीबी की पहचान कर पाना इस लिए मुश्किल होता है, क्योंकि इस तरह के मरीजों के आंखों के पर्दे के पीछे की जांच नहीं हो पाती। ऐसे में पहले मोतियाबिंद का ऑपरेशन करना पड़ता है।





बचाव के उपाय



1- शरीर में प्रोटीन की मात्रा कम न होने दें।

2- साफ-सफाई पर ध्यान दें।



3- खांसते-छींकते समय मुंह पर हाथ लगाएं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें