लाल बहादुर शास्त्री प्रशासनिक अकादमी में फर्जी आईएएस बनकर छह माह तक रही रूबी चौधरी के मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज करने में देरी पुलिस पर संदेह बढ़ा रही है। कानूनविदों का कहना है कि बयान में जितनी देरी होगी, असल आरोपियों को रूबी पर दबाव बनाने के उतने मौके मिलते रहेंगे।
जानकार बयान से पहले रूबी को रिमांड पर लिए जाने को भी गलत मानते हैं। उनका कहना है कि रिमांड के दौरान ‘खेल’ हो सकता है।
कानूनविद मानते हैं कि रूबी के मजिस्ट्रेटी बयान के बाद रूबी को रिमांड पर लिया जाता तो मामले में अन्य आरोपियों पर सीधे शिकंजा कसता। उनका कहना है कि ऐसा संभव ही नहीं है कि प्रशासनिक अकादमी में रूबी छह माह तक बिना किसी की शह के रही हो।