नौ बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद इन सीटों पर मजबूत प्रत्याशी तलाशना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती होगी। कांग्रेस भले ही दावा कर रही है कि बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन हकीकत यह है कि खाली हुई इन सीटों पर पार्टी के पास कोई बड़ा नाम नहीं है।
84041 से अधिक मतदाताओं वाली रुद्रप्रयाग सीट पर हरक सिंह रावत ने पिछले चुनाव में अपने रिश्तेदार और पूर्व कैबिनेट मंत्री मातबर सिंह कंडारी को 1326 मतों से शिकस्त दी थी। जबकि, कंडारी उत्तर प्रदेश के समय से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे। इस सीट के लिए अब कांग्रेस से भरत चौधरी एवं कुछ अन्य दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं।
वहीं, 2012 में बनी नई सीट रायपुर पर उमेश शर्मा ने कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की थी। उनके बागी होने के बाद क्षेत्र में कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान की सक्रियता बढ़ गई है। वहीं प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता आरपी रतूड़ी भी इस सीट से दावेदारी कर रहे हैं, जबकि जिला पंचायत सदस्य हेमा पुरोहित सहित कुछ अन्य कार्यकर्ता भी दावा कर सकते हैं।
कांग्रेस के इन धुरंधरों का विकल्प कहां से लाएगी कांग्रेस
हरक सिंह रावत
- फोटो : पीटीआई
केदारनाथ सीट से भाजपा की आशा नौटियाल 2012 से पहले लगातार दो बार की विधायक रहीं। 2012 में कांग्रेस की शैलारानी रावत उन्हें 2328 मतों से हराकर विधान सभा पहुंची थीं, लेकिन अब वे भी भाजपाई हो चुकी हैं। इनके अलावा खानपुर में कुंवर प्रणव चैंपियन, रुड़की में प्रदीप बत्रा, रामनगर में अमृता रावत, जसपुर में शलेंद्र मोहन सिंघल, सितारगंज में विजय बहुगुणा और नरेंद्र नगर में सुबोध उनियाल का मजबूत विकल्प भी कांग्रेस को तलाशना होगा।
बागी विधायकों के कांग्रेस में जाने से भाजपा की पोल खुल चुकी है। भाजपा अब तक कहती आ रही थी कि बागी विधायकों से उसका कोई लेना देना नहीं है। इन सीटों के लिए कांग्रेस के पास प्रत्याशियों की कमी नहीं है।
-आरपी रतूड़ी, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता
इस बार जमकर होगा भीतरघात
बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी में खलबली मची हुई है। बागी विधायकों की सीटों पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने का सपना देख रहे नेताओं बेचैनी का आलम है। टिकट न मिलने पर पार्टी को इन नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। वहीं, इन विधायकों के समर्थक अब भी कांग्रेस में जमे हुए हैं। ऐसे में कांग्रेस में भी भीतरघात की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।