रिस्पना नदी (ऋषिपर्णा) के पुनर्जीवन के लिए शनिवार को उद्गम स्थल लंढौर के शिखर फाल से लेकर संगम स्थल मोथरोवाला तक एक साथ गड्ढे खोदने का अभियान चला। रिस्पना को जीवनदान देने के लिए श्रमदान करने वालों में खासा जोश दिखा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वयं फावड़े से गड्ढा खोदकर श्रमदान में लगे हजारों लोगों का उत्साह बढ़ाया। शिखर फाल की दुर्गम पहाड़ी पर चढ़कर स्कूल, कालेज के छात्रों व आईटीबीपी के जवानों ने गड्ढे बनाए। जुलाई माह में दूसरा अभियान पौधरोपण का चलेगा।
रिस्पना नदी का उद्गम स्थल लंढौर क्षेत्र के शिखर फाल से शुरू होता है और मोथरोवाला दौड़वाला के पास रिस्पना व बिंदाल नदी का संगम होता है। शनिवार को मुख्यमंत्री ने शिखर फाल से मिशन रिस्पना अभियान का शुभारंभ किया। शिखर फाल से मोथरोवाला तक करीब 30 किलोमीटर क्षेत्र में बनाए गए 39 सेक्टरों में स्कूलों, कालेज के छात्र-छात्राओं के अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों, स्वयं सेवी संस्थाओं के वालंटियरों, केंद्रीय संस्थानों व सरकारी विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों ने श्रमदान दिया। शिखर फाल की दुर्गम पहाड़ी पर युवाओं के साथ आईटीबीपी, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस ने गड्ढे बनाने का मोर्चा संभाला।
सुबह सात बजे से दोपहर 12 बजे गड्ढे खोदने का अभियान चलाया गया। मुख्यमंत्री ने नदी के उद्गम से लेकर संगम तक अभियान में जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ाया। साथ ही मुख्य सचिव उत्पल कुमार, जिलाधिकारी देहरादून एसए मुरुगेशन, एसपी निवेदिता कुकरेती आदि तमाम अधिकारियों ने गड्ढे खोदने में सहयोग किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छह नवंबर 2017 को रिस्पना के पुनर्जीवन का संकल्प लिया था। लोगों के उत्साह व जन सहभागिता से इस संकल्प को नई ऊर्जा मिली है। समाज के सहयोग से अभियान को लक्ष्य हासिल करने में कामयाबी मिलेगी।
मैड संस्था के 200 वालंटियरों ने श्रमदान
मैड संस्था के संस्थापक अध्यक्ष अभिजय नेगी का कहना है कि रिस्पना पुनर्जीवन का अभियान संस्था गत सात वर्षों से चला रही है। संस्था के आग्रह पर सरकार ने रिस्पना नदी के पुनर्जीवन अभियान को प्राथमिकता में शामिल किया। मैड संस्था ने रिस्पना को उद्गम से लेकर गंगा विलय तक करीब 60 किलोमीटर (लंढौर से रायवाला) के पूरे बहाव क्षेत्र को पैदल चलकर नापा था। गड्ढे खोदने के अभियान में संस्था के 200 वालंटियरों ने श्रमदान दिया। शिखर फाल, तपोभूमि आश्रम, मोठूरावला में चलाए गए अभियान में संस्था के स्वयंसेवी आगे रहे। संस्था के अभियान को दून डिफेंस ड्रीमर्स, विवेरली स्कूल, ब्राइटलैंड्स स्कूल, पाइन हॉल का विशेष सहयोग मिला।