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लो खुल गई कोषागार कर्मचारियों की 'किस्मत'

Tue, 19 Nov 2013 08:41 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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सोमवार को उत्तराखंड शासन ने कोषागार कर्मियों का वेतन संशोधित कर दिया। इसके साथ ही शासन द्वारा उन्हें 1986 से एरियर देने का आदेश भी जारी किया गया है।
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पहले कर लिया था किनारा
कोषागार कर्मियों को आठ नवंबर 2000 तक का एरियर उत्तर प्रदेश देगा और इसके बाद का भुगतान उत्तराखंड सरकार करेगी। यह तब है जबकि राज्य कर्मचारियों को 2008 से नोशनल तक नहीं दिया गया। मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों की मांग मानी गई पर उन्हें एरियर नहीं दिया गया। सफाई कर्मचारियों की मांगों को शासन ने माना पर एरियर को सरकारी खजाने पर बोझ बताकर किनारा कर लिया गया।

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सूत्रों के मुताबिक कोषागार कर्मियों के 1986 से वेतन संशोधन का फैसला राज्य कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान ही कर
लिया गया था। पर राज्य कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए इस फैसले का जीओ जारी करने से बचा गया। सोमवार को शासन ने इसका जीओ भी जारी कर दिया।

दिया जाएगा बढ़ा हुआ वेतनमान
वित्त सचिव भास्करानंद के मुताबिक कोषागार कर्मियों को 1986 से बढ़ा हुआ वेतन दिया जाएगा। एक जनवरी 1986 से कोषागार सहायक लेखाकार को 1200-2040 की जगह 1400-2300 वेतनमान दिया जाएगा। लेखाकार का वेतनमान 1400-2600 की जगह अब 1640-2900 होगा।
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वहीं अब यह भी तय है कि कोषागार कर्मियों के वेतन संशोधन के बाद अब राज्य कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी जोर पकड़ेगी। राज्य कर्मचारियों को सरकार ने वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए वेतन विसंगति कमेटी की बैठक बुलाने का आश्वासन दिया था।

सचिव वित्त से की मुलाकात
सोमवार को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह, प्रवक्ता अरुण पांडे आदि ने सचिव वित्त भास्करानंद से मिलकर शासन के स्तर पर बनी सहमति के आधार पर शासनादेश जारी कराने का आग्रह भी किया। कर्मचारी नेताओं का यह भी कहना था कि हड़ताल अवधि के दिनों का वेतन उपार्जित अवकाश में समायोजित किया जाना है जो अभी तक नहीं हुआ।

शासन के इस फैसले से कोषागार के करीब 600 कर्मियों को सीधे फायदा होगा। कर्मचारियों को करीब ढाई लाख से लेकर चार लाख रुपए तक का फायदा मिलेगा। सरकारी खजाने पर करीब 12 से 14 करोड़ रुपए तक का बोझ पड़ने का अनुमान है।
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आदेश को मानने की मजबूरी थी
सरकार के सामने हाइकोर्ट के आदेश को मानने की भी मजबूरी थी। आठ मार्च को हाई कोर्ट ने इस संदर्भ में आदेश जारी किया था। 18 अक्टूबर की कैबिनेट में इस पर सहमति जता दी गई थी। इससे पहले तीन बार कैबिनेट में यह मसला आया पर इस पर एक राय नहीं बन पाई। 18 अक्टूबर के कैबिनेट के फैसले के बाद 18 नवंबर को यह आदेश जारी हो पाया।

कैबिनेट के फैसले के एक माह बाद जाकर कर्मचारियों की मुराद पूरी हो पाई। फिर भी आदेश जारी होने से कर्मचारियों को उनका जायज हक मिला है।
- प्रदीप कोहली, प्रदेश महामंत्री राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद

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