दून निवासी ट्रांसपोर्टर जीत सिंह रमोला उर्फ जीतू का परिवार सदमे में है और किसी अनहोनी की आशंका में डरा हुआ है।
न तो कोई तनाव था न ही विवाद
किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि जीतू ने ऐसा कदम क्यों उठाया? जितने लोग उतनी आशंकाएं लेकिन यकीन करने का मन किसी पर भी नहीं हो रहा है। जीतू के बड़े भाई राजेंद्र सिंह बताते हैं कि घर में न तो कोई तनाव था न ही विवाद हुआ था।
पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि जीतू ने अपना मोबाइल बंद रखा हो। अपहरण की आशंका को भी वह खारिज करते हैं। ऐसे में किसी की समझ में नहीं आ रहा है कि जीतू आखिर गए कहां?
सरवाला निवासी जीत सिंह रमोला सोमवार सुबह किसी को बिना कुछ बताए कार से गए थे, लेकिन अब तक नहीं लौटे। उनके दोनों मोबाइल नंबर स्विच ऑफ हैं। उनकी कार भी नहीं मिली है। मंगलवार सुबह से घर पर परिचितों और रिश्तेदारों का तांता लगा है।
रमोला की दो टूरिस्ट बसें हैं, जबकि बडे़ भाई राजेंद्र सिंह पटेलनगर स्थित टेलीफोन एक्सचेंज में कार्यरत हैं। छोटा भाई हरेंद्र पुलिस में है और हरिद्वार में तैनात है। चौथा भाई रतेंद्र सिंह वन विभाग में है। संपन्न परिवार जीत के इस कदम से बेहद आहत है।
मां और पत्नी का रोते-रोते बुरा हाल है। आने जाने वालों से जीतू की मां बसंती कहती हैं कि कोई जीतू को बता दे कि उसके बिना उसकी मां तड़प रही है, वह जहां भी होगा चला आएगा।
क्लेमेंटाउन में थी अंतिम लोकेशन
ट्रांसपोर्टर रमोला का एक मोबाइल बंद था, जबकि दूसरे की अंतिम लोकेशन क्लेमेंटटाउन क्षेत्र में मिली है। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया है। पुलिस की पड़ताल में अब तक यही तथ्य हाथ लगा है।
नहीं आया कोई पुलिसकर्मी
परिजनों का कहना है कि रमोला की गुमशुदगी को पुलिस गंभीरता से नहीं ले रही है। तीस घंटे बीतने के बाद किसी सिपाही तक ने घर आकर हाल जानने की कोशिश नहीं की। थाने जाने या फोन करने पर जवाब मिल रहा है कि निश्चित रहें, कार्रवाई चल रही है।