लंबे समय तक अटकी रही चिकित्सकों की स्थानांतरण नीति पर बीते बुधवार को वित्त की मंजूरी के बाद प्रमुख सचिव ने शुक्रवार को आदेश जारी कर दिए।
नीति प्रभावी होने से अब डॉक्टरों को पहाड़ चढ़ना होगा। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में मरीजों को इलाज भी मिल सकेगा।
गौरतलब है कि सीएम हरीश रावत ने विशेषाधिकार से चिकित्सकों की तबादला नीति को मंजूरी दी थी, लेकिन करीब तीन सप्ताह तक वित्त में फाइल लटकी रही।
अब तबादला नीति प्रभावी होने से चिकित्सकों के तबादलों में होने वाले राजनीतिक दखल पर भी विराम लगेगा। कहीं भी तबादला होने पर चिकित्सक चाह कर भी नियुक्ति स्थल नहीं बदलवा पाएंगे। बताया गया कि नीति इस तरीके से तैयार की गई है कि उससे चिकित्सक पर्वतीय क्षेत्रों में सेवाओं की तरफ आकर्षित हो सकेंगे।
सख्ती से होगा नीति का अनुपालन
- तबादला नीति का अनुपालन सख्ती से होगा। लंबे समय से एक जगह जमे चिकित्सकों का स्थानांतरण किया जा सकेगा। चिकित्सकों की मैदान और पहाड़ पर तर्कसंगत तैनाती के लिए तबादला नीति कारगर होगी। नीति के तहत दुर्गम के चिकित्सकों को सुगम और सुगम के डॉक्टरों का दुर्गम में तबादला हो सकेगा। नीति में तबादला आदेशों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई के प्रावधान हैं। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में किसी का तबादला निरस्त करने का अधिकार एक समिति के पास है।
दुर्गम में तैनाती के कई फायदे भी
- सुगम से दुर्गम में तैनात होने वाले चिकित्सकों को मूल वेतन का 20 फीसदी अधिक मिलेगा। दुर्गम में तैनात होने वाले चिकित्सक को परिवार शहर में रखने पर हाउस रेंट की व्यवस्था भी रहेगी। मेडिकल स्नातकोत्तर कोर्स में प्रवेश के लिए प्राथमिकता मिलेगी। किसी भी चिकित्सक का एक स्थान पर तबादला होने पर उसे वहां पांच वर्ष से अधिक नहीं रहना होगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों को जिला अस्पतालों और बेस अस्पतालों में स्थानांतरित करने की प्राथमिकता तय की गई है।